छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक बनिस कानून, राजपत्र में होइस प्रकाशन; जानव कतका सजा के हे प्रावधान
Religious Freedom Bill : रायपुर। छत्तीसगढ़ में जबरन अउ लालच देके धर्मांतरण रोके बर बनाए गे ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ अब कानून बन गे हे। विधानसभा में 19 मार्च के पारित होय के बाद, 6 अप्रैल के राज्यपाल रमेन डेका ह एमां हस्ताक्षर कर दीन, जेकर बाद अब एला राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित कर दे गे हे।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ह विधानसभा में ये विधेयक ला पेश करे रिहिन। ओमन कहिन कि साल 1968 के कानून अब आज के समय बर काफी नहीं रिहिस। बस्तर अउ सरगुजा जइसन इलाका मन में धर्मांतरण के सेती आपसी झगड़ा अउ तनाव बढ़त रिहिस, जेला रोके बर ये कड़ा कानून लाना जरूरी हो गे रिहिस।
का हे नवा नियम? अब कोनो घलो मनखे ला अगर अपन धरम बदलना हे, त ओला पहिली अधिकारी मन ला आवेदन देना पड़ही। ओकर बाद सूचना सार्वजनिक करे जाही अउ जांच के बाद ही प्रमाणपत्र मिलही। कोनो घलो दबाव, लालच या डर दिखा के धर्मांतरण नहीं करा सकय। ये कानून में ग्राम सभा ला घलो अधिकार दे गे हे। बिहाव (शादी) ला धर्मांतरण के आधार नहीं माने जाही, बिहाव के बाद घलो नियम के पालन करना अनिवार्य होही।
सजा अउ जुर्माना के कड़ा प्रावधान: ये कानून में अवैध धर्मांतरण कराए वइया मन बर बहुत कड़ा सजा तय करे गे हे:
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सामान्य अवैध धर्मांतरण: 7 ले 10 साल के जेल अउ कम से कम 5 लाख रुपिया जुर्माना।
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महिला, SC-ST या नाबालिग के धर्मांतरण: 10 ले 20 साल के जेल अउ 10 लाख रुपिया जुर्माना।
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सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion): 10 साल ले लेके आजीवन कारावास अउ 25 लाख रुपिया जुर्माना।
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लोक सेवक (सरकारी कर्मचारी) के संलिप्तता: 10 ले 20 साल के जेल अउ 10 लाख रुपिया जुर्माना।
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डर या लालच दिखा के धर्मांतरण: 10 ले 20 साल के जेल अउ 30 लाख रुपिया तक जुर्माना।
अगर कोनो मनखे ये अपराध ला दोबारा करथे, त ओला आजीवन कारावास (उम्रकैद) के सजा हो सकथे। एमां पीड़ित मन बर मुआवजा के घलो व्यवस्था हे, जेला आरोपी ला देना पड़ही। ये मामला मन के जांच सब-इंस्पेक्टर या ओकर ले बड़े अधिकारी मन करिहें।



