डिजिटल पेमेंट अब डबल सिक्योरिटी के साथ: RBI के नए नियम, हर ट्रांजैक्शन में अनिवार्य होगा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन
नई दिल्ली. देशभर में तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। RBI ने नए गाइडलाइन जारी करते हुए साफ किया कि अब हर डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य होगा। इसका सीधा असर देश के करोड़ों यूजर्स पर पड़ेगा, जो UPI, क्रेडिट-डेबिट कार्ड या मोबाइल वॉलेट से पेमेंट करते हैं।
नए नियमों की खास बातें
हर पेमेंट पर डबल सिक्योरिटी:
अब सिर्फ़ OTP से पेमेंट नहीं होगा, यूज़र को UPI पिन / पासवर्ड / बायोमैट्रिक जैसे दूसरे वेरिफिकेशन की भी ज़रूरत होगी।
₹5,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर ज्यादा सतर्कता:
बड़े पेमेंट्स के लिए एक्स्ट्रा सिक्योरिटी लेयर लागू की जाएगी।
3 महीने की डेडलाइन:
बैंकों और पेमेंट ऐप्स को अगले 90 दिनों में नया सिस्टम लागू करना होगा।
फ्रॉड पर लगाम:
फेक UPI रिक्वेस्ट और साइबर ठगी को रोकने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।
क्यों उठाया गया यह कदम?
2024-25 में देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड स्तर देखा गया। लेकिन साथ ही साइबर फ्रॉड और फिशिंग अटैक के मामले भी बढ़ गए। कई शिकायतों में यूज़र्स की जानकारी चुराकर उनके अकाउंट से पैसे निकालने की बात सामने आई।टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से अब हर पेमेंट यूज़र की सक्रिय सहमति और डिवाइस वेरिफिकेशन के बाद ही होगा।
यूजर्स पर असर
पेमेंट प्रोसेस पहले से थोड़ा लंबा हो सकता है।
लेकिन ठगी और फेक रिक्वेस्ट से सुरक्षा मिलेगी।
अगर कोई अनजान डिवाइस से लॉगिन करेगा तो यूज़र को तुरंत अलर्ट आएगा।
इससे आम लोगों का डिजिटल पेमेंट पर भरोसा और बढ़ेगा।
RBI का यह फैसला भारत की डिजिटल इकॉनमी को और मज़बूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से न सिर्फ़ पेमेंट सुरक्षित होंगे बल्कि साइबर अपराधियों की चाल भी नाकाम होगी।




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