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OBC Intellectuals Conference: छत्तीसगढ़ में OBC की 67 जातियां, फिर भी सांस्कृतिक विरासत एक, तोखन साहू बोले- एकजुटता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत

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OBC Intellectuals Conference: छत्तीसगढ़ में OBC की 67 जातियां, फिर भी सांस्कृतिक विरासत एक, तोखन साहू बोले- एकजुटता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत

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38169-chhattisgarh-obc-67-castes-tokhan-sahu-bjp-obc-morcha-raipur OBC Intellectuals Conference: छत्तीसगढ़ में OBC की 67 जातियां, फिर भी सांस्कृतिक विरासत एक, तोखन साहू बोले- एकजुटता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत

रायपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में सोमवार को आयोजित प्रबुद्धजन सम्मेलन एवं भाजपा ओबीसी मोर्चा की संभागीय बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू शामिल हुए। कार्यक्रम में उन्होंने ओबीसी समाज की एकजुटता, सामाजिक सशक्तीकरण और संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक साहू सहित पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर समाज को जोड़ने और जागरूक करने का कार्य संगठन को और मजबूत बना रहा है।

67 जातियां, लेकिन सांस्कृतिक विरासत एक

केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत करीब 67 जातियां आती हैं। जातियां भले ही अलग-अलग हों, लेकिन उनकी परंपराओं, रहन-सहन और सांस्कृतिक मूल्यों में काफी समानता है।

उन्होंने कहा कि यही एकता ओबीसी समाज की सबसे बड़ी ताकत है और इसे किसी छोटे दायरे तक सीमित नहीं रखना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि ओबीसी समाज से आने वाला व्यक्ति देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचा है, जो पूरे समुदाय के लिए गौरव की बात है।

मंडल आयोग से ओबीसी आरक्षण तक का किया उल्लेख

अपने संबोधन में तोखन साहू ने ओबीसी अधिकारों के संघर्ष के इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने काका कालेलकर आयोग से लेकर मंडल आयोग की सिफारिशों और वर्ष 1990 में ओबीसी आरक्षण लागू किए जाने तक की घटनाओं का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1992 में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी फैसले के बाद ओबीसी आरक्षण को संवैधानिक मान्यता मिली। उनके अनुसार, इसके बावजूद लंबे समय तक पिछड़े वर्ग आयोग को पर्याप्त अधिकार नहीं मिल सके।

मोदी सरकार के फैसलों को गिनाया

तोखन साहू ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में ओबीसी समुदाय के लिए किए गए विभिन्न फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने 102वें संविधान संशोधन के माध्यम से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने, क्रीमी लेयर की आय सीमा में वृद्धि तथा न्यायमूर्ति रोहिणी आयोग के गठन का जिक्र किया।

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उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में NEET के ऑल इंडिया कोटा के MBBS और PG सीटों में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। इसके अलावा 105वें संविधान संशोधन के जरिए राज्यों को अपनी ओबीसी सूची तैयार करने का अधिकार दिए जाने की बात भी उन्होंने कही।

संगठन को मजबूत कर राष्ट्र निर्माण में निभाएं भूमिका

इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक न्याय को केवल राजनीतिक नारे तक सीमित रखने के बजाय उसे योजनाओं और नीतियों के माध्यम से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने ओबीसी समाज के लोगों से आपसी एकजुटता बनाए रखने और संगठन को मजबूत करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना ही विकास की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता है। कार्यक्रम के दौरान ओबीसी समाज के सामाजिक एवं राजनीतिक सशक्तीकरण के साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया।

ये वरिष्ठ लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री अजय जामलाल, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, प्रदेश ओबीसी मोर्चा प्रभारी लखन साहू, प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी मोर्चा अशोक साहू सहित संगठन के पदाधिकारी, ओबीसी मोर्चा के कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Source: Nishaanebaz

Nishaanebaz
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Nishaanebaz
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