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CG Breaking: ट्रेनी IPS राहुल बंसल के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की मांग, अधिवक्ता मृगेंद्र सिंहदेव ने विशेष न्यायाधीश के कोर्ट में दाखिल किया आवेदन

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CG Breaking: ट्रेनी IPS राहुल बंसल के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की मांग, अधिवक्ता मृगेंद्र सिंहदेव ने विशेष न्यायाधीश के कोर्ट में दाखिल किया आवेदन

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35086-trainee-ips-rahul-bansal-prosecution-sanction-application-advocate-mrigendra-singhdev CG Breaking: ट्रेनी IPS राहुल बंसल के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की मांग, अधिवक्ता मृगेंद्र सिंहदेव ने विशेष न्यायाधीश के कोर्ट में दाखिल किया आवेदन

CG Breaking: अंबिकापुर। अंबिकापुर में पदस्थ ट्रेनी IPS एवं नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) राहुल बंसल एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। हरियाणा निवासी एक शिकायतकर्ता द्वारा एक कथित ठगी मामले की जांच के दौरान एक करोड़ रुपये रिश्वत लेने के आरोपों के बाद अब अंबिकापुर निवासी अधिवक्ता मृगेंद्र सिंहदेव ने ट्रेनी IPS के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 218 के तहत अभियोजन स्वीकृति की मांग करते हुए विशेष न्यायाधीश एवं जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया है।

आवेदन में मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, प्रमुख सचिव (गृह), कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को भी पूर्व में की गई शिकायतों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि 6 फरवरी 2026 की रात लगभग 10 बजे ट्रेनी IPS राहुल बंसल, पुलिस अधिकारियों एवं लगभग 50 सशस्त्र जवानों के साथ बिना किसी न्यायिक वारंट के उनके निज निवास में प्रवेश कर गए।

आवेदन के अनुसार, कार्रवाई के दौरान BNSS के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। अधिवक्ता मृगेंद्र सिंहदेव का आरोप है कि इस दौरान ट्रेनी IPS राहुल बंसल ने उनकी पत्नी भावना सिंहदेव की विधिवत लाइसेंस प्राप्त 32 बोर रिवॉल्वर को बिना जब्ती पंचनामा (सीजर मेमो) तैयार किए जब्त कर लिया गया। साथ ही तलाशी के दौरान किसी स्वतंत्र गवाह की भी उपस्थिति नहीं थी, जो BNSS के प्रावधानों का उल्लंघन है।

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शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई। आवेदन के मुताबिक, 8 फरवरी 2026 को आवास परिसर में लगे 16 CCTV कैमरों के DVR/NVR को जबरन निकालकर ले जाया गया तथा 17 फरवरी 2026 का CCTV डेटा भी कथित रूप से नष्ट कर दिया गया।

अधिवक्ता ने अपने आवेदन में यह भी दावा किया है कि पुलिस द्वारा बाद में BNSS की धारा 94 के तहत एक नोटिस तैयार किया गया, जिसमें थाना कोतवाली की FIR क्रमांक 77/2026 का हवाला देते हुए घर के बाहर हुई कथित फायरिंग की घटना का उल्लेख किया गया। आवेदन में प्रश्न उठाया गया है कि यदि कथित घटना घर के बाहर हुई थी तो फिर आवास की तलाशी लेने और CCTV रिकॉर्डिंग जब्त करने की आवश्यकता एवं वैधानिक आधार क्या था।

आवेदन में सुप्रीम कोर्ट के P.P. Unnikrishnan बनाम National Investigation Agency सहित विभिन्न न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया है कि बिना वारंट किसी निजी आवास में प्रवेश, तलाशी, तोड़फोड़ अथवा साक्ष्यों से छेड़छाड़ कानून सम्मत नहीं है।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर अधिवक्ता मृगेंद्र सिंहदेव ने विशेष न्यायाधीश से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं—329(3), 331(4), 316(2), 324(4), 238 एवं 61(2)—के तहत संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन चलाने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि 120 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी द्वारा अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय नहीं लिया जाता है, तो BNSS के प्रावधानों के अनुसार आगे न्यायालयीन कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Source: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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