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Asian News Investigation: अधिराज ग्रुप के डायरेक्टर शुभम सिंघल पर बहन-जीजा से 1.25 करोड़ की ठगी के आरोप में खुले बड़े ''राज''.. बहन शिवांगी को पार्टनरशिप डीड से रिटायर्ड दिखाने के मामले में रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में

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Asian News Investigation: अधिराज ग्रुप के डायरेक्टर शुभम सिंघल पर बहन-जीजा से 1.25 करोड़ की ठगी के आरोप में खुले बड़े ''राज''.. बहन शिवांगी को पार्टनरशिप डीड से रिटायर्ड दिखाने के मामले में रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में

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35618-adhiraj-group-director-shubham-singhal-accused-of-rs-1-25-crore-fraud-with-sister-and-brother-in-law-registrar-of-firms-under-scanner Asian News Investigation: अधिराज ग्रुप के डायरेक्टर शुभम सिंघल पर बहन-जीजा से 1.25 करोड़ की ठगी के आरोप में खुले बड़े ''राज''.. बहन शिवांगी को पार्टनरशिप डीड से रिटायर्ड दिखाने के मामले में रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में

Asian News Investigation: रायपुर। कारोबार में पार्टनरशिप और दोगुना मुनाफा दिलाने का झांसा देकर बहन-जीजा से करीब 1.25 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में अधिराज ग्रुप के डायरेक्टर शुभम सिंघल और उनकी पत्नी जया सिंघल के खिलाफ तेलीबांधा थाने में दर्ज एफआईआर में शिवांगी गर्ग और उनके पति को पार्टनरशिप डीड में रिटायर्ड दिखाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नागपुर के लॉ कॉलेज स्क्वायर में रहने वाली उनकी बहन कथित तौर पर पार्टनरशिप डीड से रिटायर्ड दिखाकर फर्म से बाहर किए जाने के मामले में अहम दस्तावेज तेलीबांधा पुलिस को सौंपे हैं।

शिवांगी गर्ग ने रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत हासिल दस्तावेजों के आधार पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि 6 मार्च और 6 अप्रैल 2026 को तैयार की गई पार्टनरशिप डीड में उनके फर्जी हस्ताक्षर कर उन्हें दोनों फर्मों से रिटायर्ड दिखा दिया गया। इसके बाद कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर के आधार पर उन्हें और उनके पति को साझेदारी फर्म से भी बाहर कर दिया गया। यह जानकारी उन्हें रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स से RTI के तहत मिले दस्तावेजों से मिली। शिवांगी गर्ग का दावा है कि 6 मार्च और 6 अप्रैल 2026 को वह रायपुर में मौजूद ही नहीं थीं।

चूक हुई या फ्रॉड, अधिराज ग्रुप से जुड़े खुल सकते हैं बड़े राज

भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 के तहत किसी साझेदार को फर्म से हटाने या निष्कासित करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है। पार्टनर को हटाने की प्रक्रिया साझेदारी अनुबंध में दिए गए प्रावधानों और लागू कानूनी नियमों के आधार पर की जाती है।

पार्टनर हटाने के मुख्य नियम और शर्तें

पार्टनरशिप डीड में प्रावधान:- किसी पार्टनर को तभी हटाया जा सकता है, जब इसकी स्पष्ट अनुमति मूल साझेदारी अनुबंध या डीड में दी गई हो।

सद्भावना में कार्रवाई:- भारतीय साझेदारी अधिनियम की धारा 33 के तहत निष्कासन की कार्रवाई सद्भावना में और फर्म के हित में होना जरूरी है। मनमाने ढंग से किया गया निष्कासन कानूनी विवाद का विषय बन सकता है।

नोटिस और पक्ष रखने का अवसर:- जिस पार्टनर को हटाया जाना है, उसे निष्कासन के कारणों की जानकारी देकर अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना जरूरी होता है।

बहुमत की सहमति:- लागू प्रावधानों के अनुसार साझेदारों की सहमति और आवश्यक प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स के सामने क्या होती है प्रक्रिया

संशोधित डीड तैयार करना:- पार्टनर के रिटायर होने या फर्म के पुनर्गठन के बाद संशोधित पार्टनरशिप डीड और संबंधित दस्तावेज तैयार किए जाते हैं।

रजिस्ट्रार को सूचना:- फर्म में हुए बदलाव की जानकारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित फर्म्स रजिस्ट्रार को दी जाती है। इसके लिए निर्धारित आवेदन और फीस की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

सार्वजनिक सूचना:- कुछ परिस्थितियों में तीसरे पक्ष को सूचित करने और दायित्वों से बचाव के लिए सार्वजनिक सूचना की प्रक्रिया भी अपनाई जाती है।

रजिस्ट्रार की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

इस मामले में एशियन न्यूज ने रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स से संबंधित प्रक्रिया और दस्तावेजों को लेकर जानकारी लेने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जबकि शिवांगी गर्ग की ओर से लगाए गए आरोपों और RTI से हासिल दस्तावेजों के आधार पर अब पार्टनरशिप डीड से उन्हें रिटायर्ड दिखाने की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।

पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित डीड में हस्ताक्षर किसने किए, दस्तावेज किस आधार पर तैयार हुए और रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स के समक्ष इन्हें किस प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत किया गया। फिलहाल इस मामले में तेलीबांधा थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच कर रही है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ अधिराज ग्रुप से जुड़े इस विवाद में और भी तथ्य सामने आने की संभावना है।

Source: Asian News Bharat

Asian News Bharat
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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