समान नागरिक संहिता पर छत्तीसगढ़ में रायशुमारी, कई अहम सुझाव सामने आए
रायपुर।छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) के क्रियान्वयन से पहले राज्य स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति ने विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, आयोगों और समाज के प्रतिनिधियों के साथ दो दिवसीय परामर्श बैठक आयोजित की। 10 सितंबर से शुरू हुई इस बैठक में समान नागरिक संहिता के संभावित प्रावधानों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई और विभिन्न पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए गए।
पुराना सर्किट हाउस के सभाकक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और समिति के सदस्य एम. के. राउत ने की। इस दौरान पीपीटी के माध्यम से समान नागरिक संहिता से जुड़े वर्तमान नियमों और कानूनों की जानकारी दी गई। बैठक में समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार भी उपस्थित रहे।
दो दिनों तक चली परामर्श बैठक में विवाह और तलाक, उत्तराधिकार एवं विरासत, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न सामाजिक समूहों और प्रतिनिधियों के विचार सुने गए। समिति ने इन मुद्दों पर अलग-अलग पक्षों से व्यावहारिक सुझाव लेकर संभावित प्रावधानों पर मंथन किया।
गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांतीय सचिव गजानंद नुरूटी ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय की मौलिक पहचान और अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें समान नागरिक संहिता के दायरे से अलग रखने का औपचारिक अनुरोध किया।
राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने समाज में लैंगिक समानता को लेकर सुझाव दिए। उन्होंने महिला और पुरुष को समान अधिकार देने, बेटियों और बेटों को संपत्ति में बराबर उत्तराधिकार देने, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीयन कराने तथा संपत्ति और वसीयत से जुड़े स्पष्ट कानूनी प्रावधान तैयार करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही।
क्रिश्चन समाज की ओर से राजेश जॉन पाल सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भी समिति के समक्ष अपनी राय रखी। प्रतिनिधियों ने कहा कि उनके धार्मिक दृष्टिकोण में विवाह को ईश्वर द्वारा बनाई गई अटूट जोड़ी माना जाता है। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप को सामाजिक रूप से स्वीकार नहीं किए जाने की बात भी रखी।
बैठक में राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने भी बच्चों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। समिति के सदस्यों ने सभी प्रतिनिधियों के सुझावों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना।
समिति ने कहा कि विभिन्न सामाजिक समूहों से प्राप्त सुझावों और व्यावहारिक पहलुओं का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। इन सुझावों के आधार पर एक समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
बैठक में अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ अधिवक्ता बृजेश पांडेय, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष दिनेश देवांगन, अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी और वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारती राठौर ने भी अपने सुझाव दिए। उन्होंने समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को अधिक प्रभावी, स्पष्ट और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया।
बैठक के दूसरे सत्र में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष डॉ. सुरेश मिश्रा और आशीष बाजपेयी ने समान नागरिक संहिता को लेकर अपने विचार और अभिमत समिति के समक्ष प्रस्तुत किए। मेडिकल एसोसिएशन की ओर से डॉ. कुलदीप सोलंकी, डॉ. सुरभि दुबे और डॉ. के.पी. आजमानी ने भी UCC के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय और सुझाव समिति के सामने रखे।
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Source: Ekhabri


