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मिट्टी के गणेश में जीवन का बीज, रायपुर जेल के बंदियों की अनूठी पहल

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मिट्टी के गणेश में जीवन का बीज, रायपुर जेल के बंदियों की अनूठी पहल

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रायपुर। गणेशोत्सव के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों ने आस्था, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की है। जेल में बंदियों ने प्राकृतिक मिट्टी से करीब 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। करीब 1 से 2 फीट आकार की इन प्रतिमाओं की सबसे खास बात यह है कि इनमें तुलसी समेत विभिन्न पौधों के बीज शामिल किए गए हैं।

IMG-20260908-WA0035-225x300 मिट्टी के गणेश में जीवन का बीज, रायपुर जेल के बंदियों की अनूठी पहल

इन गणेश प्रतिमाओं के निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी और रंगों का इस्तेमाल किया गया है। गणेशोत्सव के बाद जब इन प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा, तो मिट्टी में मौजूद बीज अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर पौधों का रूप ले सकेंगे। इस तरह भगवान गणेश की प्रतिमा विसर्जन के बाद भी प्रकृति के संरक्षण और हरियाली का संदेश देती रहेगी।

 

इस पहल के पीछे केंद्रीय जेल रायपुर में संचालित कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। करीब 10 बंदियों ने मेहनत, लगन और रचनात्मकता के साथ इन गणेश प्रतिमाओं को तैयार किया है। मिट्टी को आकार देने से लेकर प्रतिमाओं को प्राकृतिक रंगों से सजाने और उनमें बीजों को शामिल करने तक पूरी प्रक्रिया में बंदियों ने उत्साह के साथ भाग लिया।

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केंद्रीय जेल में बंदियों को विभिन्न कौशल आधारित गतिविधियों से जोड़कर उनकी रचनात्मक प्रतिभा को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। गणेश प्रतिमाओं का निर्माण भी इसी प्रयास का हिस्सा है। इससे बंदियों को अपनी कला और हुनर को निखारने के साथ समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

 

केंद्रीय जेल रायपुर के जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए जेल में लगातार विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं इसी सोच का परिणाम हैं।

 

उन्होंने कहा कि इन प्रतिमाओं के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि धार्मिक आस्था और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। ऐसी रचनात्मक गतिविधियां बंदियों को अपनी प्रतिभा और कौशल का सकारात्मक उपयोग करने का अवसर देती हैं। साथ ही इनके माध्यम से समाज में पर्यावरण संरक्षण और हरित जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास भी किया जा रहा है।

 

केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों द्वारा तैयार की गई ये गणेश प्रतिमाएं इसलिए भी खास हैं क्योंकि इनका उद्देश्य केवल गणेशोत्सव तक सीमित नहीं है। विसर्जन के बाद मिट्टी में मौजूद बीजों से पौधे उगने की संभावना इन्हें आस्था के साथ प्रकृति से जोड़ती है। इस पहल के जरिए गणेशोत्सव में पर्यावरण-अनुकूल परंपराओं को अपनाने और हरित संदेश को आगे बढ़ाने की एक सार्थक कोशिश की गई है।

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Source: Ekhabri

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Ekhabri
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