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सफलता के कहानी : 25 घांव के हार घलो नी रोक पाईस रद्दा, बलरामपुर के कार्तिकेय बनगे UPSC मा असिस्टेंट कमांडेंट

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सफलता के कहानी : 25 घांव के हार घलो नी रोक पाईस रद्दा, बलरामपुर के कार्तिकेय बनगे UPSC मा असिस्टेंट कमांडेंट

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रायपुर/बलरामपुर। सफलता के रद्दा ह कभू आसान नी राहय। कतको घांव लगातार मिलत हार ह मनखे ला भितरी ले तोड़ देथे, लेकिन कुछ मनखे एहीच मुसकिल मन ला अपन ताकत बना लेथें। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर के रहइया कार्तिकेय प्रसाद के कहानी घलो एकेच कस हवे। 25 ठन प्रतियोगी परीक्षा मन मा कोसिस अउ कई पल्ट के हार के बाद अखीर मा ओ ह यूपीएससी के सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा ला पास कर लीस।

कार्तिकेय के ए सफलता ओ सब्बो युवा मन बर प्रेरणा आय, जेमन कुछेक कोसिस के बाद निराश होके तैयारी ला छोड़ देथें। ओ ह अपन गलती मन ले सीखत-समझत लगातार अपन आप ला सँवारीस अउ अपन सपना ला पूरा करीस।

ददा CISF मा, दाई सँभालथे घर-दुआर अउ खेती-किसानी बलरामपुर के रहइया कार्तिकेय प्रसाद के परिवार ह एक साधारण परिवार आय। ओकर ददा कबीर प्रसाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) मा असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर हवँय। ओहीच तीरी मा ओकर दाई सुशीला बाई किसान होए के संग घर-दुआर घलो सँभालथे। ददा के नौकरी के सेती कार्तिकेय के पढ़ाई-लिखाई देश के अलग-अलग जगह मा होईस। ओ ह केंद्रीय विद्यालय दुर्ग ले अपन इस्कूल के पढ़ाई पूरा करीस अउ ओकर बाद भिलाई के कॉलेज ले आगे के पढ़ाई करीस।

रायपुर के नालंदा लाइब्रेरी मा करीस तैयारी सरकारी नौकरी के सपना ला पूरा करे बर कार्तिकेय ह रायपुर मा रहिके तैयारी सुरू करीस। ओ ह नालंदा लाइब्रेरी मा घंटों बैठ के पढ़ै अउ प्रतियोगी परीक्षा मन के तैयारी ला अपन रोज के आदत बना लीस। ए दौरान ओला कतको घांव हार के सामना करे ला परिस। फिर घलो ओ ह हर परीक्षा के बाद अपन कमज़ोरी ला समझीस अउ ओला सुधारे के कोसिस करत रीहिस।

UPSC समेत 25 परीक्षा मन मा दीस परीक्षा कार्तिकेय ह बताईस कि ओ ह यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा मा पांच घांव कोसिस करीस। एकर अलावा सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा मा घलो चार घांव बहीस। संग मा ओ ह ईपीएफओ अउ आरबीआई ग्रेड-बी समेत कतको अउ प्रतियोगी परीक्षा मन घलो दीस। लगातार मिले हार के बाद घलो ओ ह अपन तैयारी ला बंद नी करीस। ओकर मानना रीहिस कि हर परीक्षा ह एक नवा सीख देथे अउ हर गलती ले सीख के आगे बढ़े जा सकथे।

हार ला मानीस सीखे के मौका कार्तिकेय के कहना हवे कि हार ला कभू घलो बोझ या सराप नी माने ला चाही। हार ले ए पता चलथे कि कहाँ अउ मेहनत करे के अउ सुधारे के ज़रूरत हवे। ओ ह कहीस कि एकहीच गलती ला बार-बार दोहराए ले बेस हवे कि समय रहत अपन रणनीति ला बदल लेव। सही रद्दा अउ योजना ले तैयारी के दिसा ला बदले जा सकथे।

युवा मन ला दीस सफलता के मंतर कार्तिकेय ह युवा मन ला सलाह देवत कहीस कि प्रतियोगी परीक्षा के तैयारी मा अनुशासन अउ समय के ध्यान रखना सबले ज़्यादा ज़रूरी हवे। ओकर कहना हवे कि खाली पढ़ाई-लिखाईच नी, बल्कि अपन आसपास के दुनिया ला समझना घलो ज़रूरी हवे। ओ ह युवा मन ला रोज़ छापा-कागज़ (अख़बार) पढ़े अउ दुनियादारी के जानकारी बढ़ाए के सलाह देथे। संग मा ओकर मानना हवे कि मोबाइल मा अकारथ समय गँवाए ले बचे ला चाही।

मेहनत अउ धीरज ले बदल गीस करम कार्तिकेय के सफलता ह ए साबित करथे कि बार-बार के हार ह आखिरी न तीजा नी होवय। अउ अगर सपना साफ़ होवय अउ मेहनत लगातार जारी राहय त सफलता ज़रूर मिलथे। 25 कोसिस के बाद मिले ए सफलता ह ओकर धीरज, मेहनत अउ भरोसा के कहानी बन गे हवे। अब कार्तिकेय ह असिस्टेंट कमांडेंट बनके देश सेवा के अपन सपना ला आगे बढ़ाही।

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OneCG एक्सक्लूसिव रिपोर्ट OneChhattisgarh.Com
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