रंग-तरंग के दूसरे दिन गुदुम बाजा और मोहरी की धुनों ने मोहा मन
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक लोकवाद्यों और लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों के बीच तीन दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन ‘रंग-तरंग’ का दूसरा दिन खास बन गया। आयोजन स्थल पर गुदुम बाजा और मोहरी की पारंपरिक धुनें गूंजीं, जिसने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।
‘रंग-तरंग’ के दूसरे दिन लोकवाद्यों की सुरमयी प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। आयोजन के माध्यम से प्रदेश की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में पूर्व संस्कृति आयुक्त अनिल कुमार साहू विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों और बच्चों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने लोक कला और संस्कृति के संरक्षण के साथ ही पारंपरिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कलाकारों और आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी साहित्य से जुड़े विजय मिश्रा, समाजसेवी उदयभान, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। अतिथियों ने आयोजन में प्रस्तुत लोक कलाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
‘रंग-तरंग’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, साहित्य, संगीत और कला को एक साझा मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। आयोजन में पारंपरिक लोकवाद्यों की मधुर धुनों के साथ कलाकारों की प्रस्तुतियों ने प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और लोक विरासत को जीवंत रूप में सामने रखा।
लोक संस्कृति को समर्पित इस आयोजन को संस्कृति प्रेमियों और दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। ‘रंग-तरंग’ के दूसरे दिन की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि पारंपरिक लोक कलाओं को मंच और प्रोत्साहन मिलने से इन्हें नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
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Source: Ekhabri


