विश्व पर्यटन दिवस 2026 : टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने गिनाईं उपलब्धियां, 2028 तक ग्लोबल पहचान बनाने का लक्ष्य
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रायपुर। विश्व पर्यटन दिवस 2026 की तैयारियों के बीच छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने राज्य में पर्यटन विकास की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का खाका पेश किया है। टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने रायपुर स्थित कार्यालय में मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में पर्यटन को रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, जनजातीय और आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। पर्यटन को केवल घूमने-फिरने तक सीमित न रखते हुए इसे रोजगार और उद्यमिता का बड़ा माध्यम बनाया जा रहा है।
पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा, फिल्म सिटी परियोजना पर काम
नीलू शर्मा ने बताया कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई निवेशक संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। राज्य में फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी निर्माण की दिशा में भी काम जारी है। उन्होंने बताया कि फिल्म सिटी परियोजना के लिए करीब 203 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा परियोजना के लिए लगभग 147 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। कुल मिलाकर यह परियोजना करीब 350 करोड़ रुपये के संभावित निवेश के साथ विकसित की जाएगी।
रामलला दर्शन योजना से हजारों श्रद्धालुओं को लाभ
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए संचालित श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना को बड़ी उपलब्धि बताते हुए नीलू शर्मा ने कहा कि आईआरसीटीसी के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन किया गया है। इस योजना के तहत 51 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या और काशी दर्शन की सुविधा मिली है। सरकार का उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को आम लोगों के लिए और आसान बनाना है।
होमस्टे नीति से गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ
टूरिज्म बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि स्थानीय परिवारों और युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के लिए होमस्टे नीति 2025-30 लागू की गई है। इसके तहत स्थानीय संस्कृति, खान-पान और ग्रामीण जीवन को पर्यटकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक 27 होमस्टे पंजीकृत किए जा चुके हैं और 65 लाभार्थियों के 278 कमरों को चिन्हित किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
चित्रकोट को मिलेगा ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन का रूप
बस्तर के प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। यहां टेंट सिटी विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसमें 50 से ज्यादा प्रीमियम टेंट बनाए जाएंगे। इसके अलावा चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट परियोजना पर भी काम किया जा रहा है। इस परियोजना में लगभग 500 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है।
सिरपुर, मैनपाट और जशपुर पर भी विशेष फोकस
छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए अलग-अलग योजनाएं बनाई जा रही हैं। सिरपुर के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जबकि मैनपाट और जशपुर में पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। राज्य के पर्यटन स्थलों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटकर लोकप्रिय, उभरते और संभावित पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना है।
धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर जोर
नीलू शर्मा ने बताया कि भोरमदेव मंदिर कॉरिडोर विकास के लिए केंद्र सरकार से 145.99 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। इसके अलावा रतनपुर महामाया मंदिर और चंपारण्य जैसे धार्मिक स्थलों के विकास के लिए भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं। मयाली-बगीचा क्षेत्र के विकास के लिए भी करोड़ों रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
डिजिटल पर्यटन और AI पर रहेगा फोकस
विश्व पर्यटन दिवस 2026 की थीम “डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से पर्यटन का पुनः डिजाइन” को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ पर्यटन में डिजिटल सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल जानकारी और पर्यटक सुविधाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी है। एआई की मदद से पर्यटकों को उनकी पसंद और बजट के अनुसार यात्रा योजनाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
अगले 5 साल में 2350 करोड़ निवेश का लक्ष्य
टूरिज्म बोर्ड ने अगले पांच वर्षों के लिए बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत हर साल 100 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं प्रस्तावित पर्यटन नीति 2026 में निजी निवेश, ईको-टूरिज्म, समुदाय आधारित पर्यटन और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। अगले पांच वर्षों में करीब 2350 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
PPP मॉडल से विकसित होंगी पर्यटन संपत्तियां
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को पीपीपी मॉडल के जरिए विकसित करने की योजना है। इससे करीब 500 करोड़ रुपये निवेश आने और 500 से 1000 तक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ ट्रैवल मार्ट का आयोजन नवंबर 2026 में प्रस्तावित है, जिसमें देशभर के टूर ऑपरेटरों और पर्यटन कारोबारियों की भागीदारी होगी।
2028 तक बनेगी नई पर्यटन पहचान
नीलू शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की मजबूत नींव तैयार हो चुकी है। अब लक्ष्य 2028 तक राज्य को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि पर्यटन बढ़ने से रोजगार बढ़ेगा, स्थानीय आय बढ़ेगी और छत्तीसगढ़ की संस्कृति व विरासत को नई पहचान मिलेगी। इसके लिए निवेश, डिजिटल तकनीक, होमस्टे, धार्मिक पर्यटन और इको-एथनिक पर्यटन को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
Source: Nishaanebaz


