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बस्तर दशहरा का भव्य समापन, माता मावली की डोली को दी गई विदाई

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बस्तर दशहरा का भव्य समापन, माता मावली की डोली को दी गई विदाई

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रायपुर/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक बस्तर दशहरा का मंगलवार को विधिवत समापन हो गया। 75 दिनों तक चले इस अनूठे धार्मिक आयोजन का समापन माता मावली की डोली और मां दंतेश्वरी के छत्र की पारंपरिक विदाई के साथ हुआ। जगदलपुर स्थित राजमहल परिसर के ऐतिहासिक मां दंतेश्वरी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार के बाद विदाई की रस्में पूरी की गईं। इस दौरान हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरा परिसर माता के जयकारों से गूंज उठा।

 

माता मावली की विदाई के अवसर पर महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर मंगल गीत गाए और माता को आत्मीय विदाई दी। पुलिस के जवानों ने भी माता को सलामी दी। विदाई यात्रा के लिए दंतेश्वरी मंदिर परिसर और मार्ग को लगभग डेढ़ क्विंटल गेंदे, गुलाब और बासंती फूलों की पंखुड़ियों से सजाया गया था। डोली के प्रस्थान के समय श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर अपनी आस्था प्रकट की।

 

इस अवसर पर माता की पारंपरिक डोली आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। बेल और सागौन की लकड़ी से बनी इस डोली को लगभग 15 वर्ष पुराना बताया गया है। इसमें करीब चार किलो चांदी, दोनों ओर चांदी की प्रतिमाएं और 45 चांदी के गुब्बे जड़े हुए हैं। यह डोली बस्तर की समृद्ध धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

 

परंपरा के अनुसार, बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव और श्रद्धालुओं ने लगभग 20 किलो वजनी माता मावली की डोली को कंधों पर उठाकर जिया डेरा तक पहुंचाया। इसके बाद डोली और मां दंतेश्वरी के छत्र को दंतेवाड़ा के लिए रवाना किया गया। विदाई समारोह में शामिल श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई थी। मंदिर पहुंचे दर्शनार्थियों को 76 किलो बूंदी और लड्डुओं से तैयार पांच हजार से अधिक पैकेट वितरित किए गए।

 

विदाई की परंपरा के तहत माता को 25 किलो चावल, 11 किलो दाल, घी, मसाले और श्रृंगार सामग्री भी भेंट की गई। धार्मिक विधि-विधान और पारंपरिक रस्मों के साथ संपन्न हुई यह विदाई बस्तर की लोक आस्था और सांस्कृतिक पहचान की महत्वपूर्ण झलक रही।

 

75 दिनों तक चले बस्तर दशहरा में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक आयोजन संपन्न हुए। अन्य क्षेत्रों में मनाए जाने वाले दशहरे से अलग, बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं और लंबी अवधि के लिए देशभर में जाना जाता है। माता मावली की डोली और मां दंतेश्वरी के छत्र की विदाई के साथ इस वर्ष के ऐतिहासिक आयोजन का औपचारिक समापन हो गया।

 

इस अवसर पर राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा, बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, नाईक-पाईक, जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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साभार: Ekhabri

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Ekhabri
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OneChhattisgarh संपादकीय डेस्क
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