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डिजिटल युग में सतर्कता जरूरी, कृषि विश्वविद्यालय में चला साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान

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डिजिटल युग में सतर्कता जरूरी, कृषि विश्वविद्यालय में चला साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान

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रायपुर। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के बीच लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान के तहत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में एक दिवसीय साइबर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में कृषि विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं को साइबर अपराध के विभिन्न स्वरूपों तथा ऑनलाइन ठगी से बचने के प्रभावी उपायों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में कृषि विकास, किसान कल्याण तथा आदिम जाति मंत्री रामविचार नेताम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल विशिष्ट अतिथि रहे, जबकि रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारियों ने साइबर अपराधों की कार्यप्रणाली, ऑनलाइन फ्रॉड के नए तरीकों और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामविचार नेताम ने कहा कि देशभर में साइबर अपराध और साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति सचेत करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा साइबर जागृति अभियान संचालित किया जा रहा है। उन्होंने अभियान के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस की सराहना करते हुए इसकी सफलता की शुभकामनाएं दीं।

रामविचार नेताम ने कहा कि डिजिटल युग में सुरक्षित रहने के लिए जागरूकता और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के प्रति जागरूक रहने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल सावधानी बरतने की अपील की।

रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने बताया कि देश में पिछले चार वर्षों के दौरान साइबर अपराध और ठगी के मामलों में 12 गुना वृद्धि हुई है। इसी अवधि में साइबर ठगी से जुड़ी राशि में करीब 40 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि आंकड़ों के अनुसार देश में प्रतिदिन लगभग 61 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो रही है।

डॉ. शुक्ला ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, ओटीपी फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी नौकरी और निवेश योजनाओं के अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में नागरिकों को डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा राज्य में साइबर अपराधों की रोकथाम और नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक साइबर जागृति अभियान चलाया जा रहा है। छह सप्ताह के इस अभियान के तहत स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, बैंक खाताधारकों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, कर्मचारियों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों सहित समाज के विभिन्न वर्गों तक साइबर सुरक्षा की जानकारी पहुंचाई जा रही है।

कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया और इंटरनेट आधारित सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों का खतरा भी बढ़ा है। साइबर अपराधी लोगों को झांसा देने के लिए फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक, ओटीपी, फर्जी पहचान, डिजिटल अरेस्ट और नौकरी या निवेश के नाम पर ठगी जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड नंबर, पासवर्ड या अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और अनजान कॉल या संदेशों के जरिए मिलने वाले लालच, प्रलोभन अथवा धमकियों पर भरोसा न करें।

साइबर ठगी होने की स्थिति में नागरिकों को तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई। पुलिस ने कहा कि समय पर शिकायत करने से ठगी की राशि को रोकने और अपराध की जांच में मदद मिल सकती है।

साइबर जागृति अभियान का उद्देश्य केवल लोगों को साइबर अपराधों की जानकारी देना नहीं, बल्कि नागरिकों में सुरक्षित डिजिटल व्यवहार की आदत विकसित करना भी है। जागरूकता और सतर्कता के माध्यम से साइबर अपराधों की रोकथाम को प्रभावी बनाया जा सकता है।

कार्यशाला में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक, कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता, विभिन्न संचालक, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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Source: Ekhabri

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Ekhabri
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