छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने राज्यपाल ने शुरू की पहल
रायपुर । छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में राज्य में एक नई पहल शुरू हुई है। राज्यपाल रमेन डेका से मंगलवार को लोक भवन में छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने मुलाकात की। इस दौरान छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन, विकास और उसे संवैधानिक मान्यता दिलाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश और मानकीकरण की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा और प्रमुख संपर्क भाषा है। वर्तमान में करीब डेढ़ करोड़ लोग छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग करते हैं।
भाषाविदों के साथ चर्चा के दौरान राज्यपाल रमेन डेका ने इस विषय पर स्वयं पहल करते हुए छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की संभावनाओं पर सार्थक बातचीत की। उन्होंने कहा कि इस दिशा में एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश और इससे जुड़ी अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन करेगी।
राज्यपाल ने कहा कि समिति की प्रक्रिया में विषय के विद्वानों और विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी और सुझाव भी लिए जाएंगे, ताकि छत्तीसगढ़ी भाषा से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया जा सके। इस दौरान उन्होंने असमिया और बोडो भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया।
भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में 15वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना और पत्रकारिता सहित साहित्य की विभिन्न विधाओं में छत्तीसगढ़ी में पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है।
जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ी व्याकरण वर्ष 1890 में तैयार किया गया था, जबकि पहला शब्दकोश वर्ष 1939 में सामने आया। वर्ष 1924 में छत्तीसगढ़ी का पहला उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ प्रकाशित हुआ था। इसके अलावा पंडित सुंदरलाल शर्मा ने जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ का प्रकाशन किया था, जो भाषा और साहित्य के विकास की ऐतिहासिक परंपरा को दर्शाता है।
भाषाविदों ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी भाषा का अध्ययन कराया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार शीलकांत पाठक और अर्चना पाठक उपस्थित रहे।
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Source: Ekhabri


