अरुण साव का आदेश, सुबह शहर में निकलें अधिकारी और देखें जमीनी हकीकत
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने राज्य के सभी नगर निगमों और जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को शहरों की व्यवस्थाओं में सुधार और विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों से स्वच्छता, राजस्व वसूली, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में जवाबदेही के साथ काम करने को कहा।
अरुण साव ने कहा कि नगरीय निकाय केवल बजट खर्च करने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि शहर के भविष्य की योजना बनाने, नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और जनकल्याण सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। उन्होंने अधिकारियों को सक्रियता के साथ काम करते हुए राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ समय पर अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। निकायों की आय बढ़ाने के लिए संपत्तियों का सर्वे कर नई संपत्तियों की पहचान करने तथा संपत्ति कर के भुगतान के लिए अधिक से अधिक नगरीय निकायों में ऑनलाइन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने और निर्माणाधीन कार्यों का नियमित एवं कड़ाई से निरीक्षण करने को कहा।
उप मुख्यमंत्री ने राजस्व वसूली, निर्माण कार्य, साफ-सफाई और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा के लिए प्रभावी कार्यपद्धति विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कार्यालय तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें शहरों की वास्तविक स्थिति को मौके पर जाकर समझना होगा।
अरुण साव ने निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को प्रतिदिन सुबह शहर का भ्रमण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मॉर्निंग विजिट के दौरान अधिकारी साफ-सफाई, निर्माण कार्यों और शहर की अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें। इससे मैदानी हकीकत सामने आएगी और नागरिकों की समस्याओं तथा उनके फीडबैक की जानकारी भी सीधे मिल सकेगी।
अवैध कब्जों और अतिक्रमण के मामलों में भी उन्होंने तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने से भविष्य में सड़क, पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए ऐसे मामलों में निकायों को सक्रिय और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश और पर्यटन की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में शहरों की अधोसंरचना को भी भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से वर्तमान जरूरतों के साथ आने वाले वर्षों की चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकास योजनाएं तैयार करने को कहा।
जल संरक्षण को लेकर अरुण साव ने नगरीय निकायों में अगले 50 वर्षों की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चिंतन शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और उपयोग किए गए पानी के पुनः उपयोग के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया। साथ ही सभी शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक पेयजल की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि भविष्य के जल संकट से बचने के लिए अभी से दीर्घकालिक रणनीति बनाकर काम करना होगा। नगरीय निकायों के अधिकारी शहरों की छवि और विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए उन्हें पूरी क्षमता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
# शहर की व्यवस्था ऐसी हो कि नागरिकों को निकाय की मौजूदगी महसूस हो
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि नगरीय निकायों की जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्यों और योजनाओं को पूरा करने तक सीमित नहीं है। शहर की व्यवस्थाओं का सुचारू और निर्बाध संचालन भी निकायों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि तेजी से हो रहे शहरीकरण और बढ़ती जनआकांक्षाओं के अनुरूप नगरीय निकायों को भविष्य की जरूरतों का रोडमैप तैयार कर उस पर प्रभावी ढंग से अमल करना होगा। शहरवासियों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में नगरीय निकाय की मौजूदगी और सेवाओं का स्पष्ट अहसास होना चाहिए। उन्होंने विभिन्न आयोजनों और कार्यक्रमों में नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया।
सोनमणि बोरा ने कहा कि नगरीय निकायों का दायित्व संवैधानिक है और इसका कार्यक्षेत्र व्यापक है। नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ शहरों में आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित करना भी निकायों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि योजनाओं और विकास कार्यों का असर केवल सरकारी दस्तावेजों में नहीं, बल्कि धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने शहरों में उपलब्ध खाली स्थानों का चिन्हांकन कर वहां सघन वृक्षारोपण कराने तथा अर्बन फॉरेस्ट विकसित करने के निर्देश दिए। फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त रखने और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के निर्देशों का गंभीरता और सक्रियता से पालन करने को कहा। साथ ही सामान्य सभा और एमआईसी की बैठकें समयबद्ध तरीके से नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में निर्माणाधीन सभी नालंदा परिसरों को जल्द शुरू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने पर भी जोर दिया गया। प्रमुख सचिव ने फर्नीचर, आईटी सुविधाओं, किताबों और अन्य जरूरी संसाधनों के लिए राशि स्वीकृत कर जल्द टेंडर जारी करने के निर्देश दिए।
बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और संचालक नीलेशकुमार क्षीरसागर सहित सूडा के सीईओ सुमित अग्रवाल, अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य, मुख्य अभियंता रमेश शर्मा, सभी नगर निगमों के आयुक्त, जिला मुख्यालय वाले नगरीय निकायों के सीएमओ, राजस्व अधिकारी, वरिष्ठ अभियंता और संभागीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक मौजूद रहे।
# इन योजनाओं और कार्यों की हुई समीक्षा
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की घोषणाओं की अद्यतन स्थिति, अधोसंरचना विकास कार्य, नालंदा परिसर, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, 15वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अमृत मिशन, जल आवर्धन योजनाओं, पीएम स्वनिधि और पीएम ई-बस सहित विभिन्न राज्य प्रवर्तित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
इसके अलावा राजस्व वसूली, वेतन भुगतान, एनर्जी बिल ऑडिट, एबीसी रूल्स, गोधाम योजना, नगरीय निकायों की टीम द्वारा प्रतिदिन मॉर्निंग विजिट, सीएम हेल्पलाइन, लोक सेवा गारंटी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जुड़े कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
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Source: Ekhabri


