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पितृत्व विवाद ऊपर सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसला : सच अउ न्याय बर डीएनए टेस्ट जरूरी हे

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पितृत्व विवाद ऊपर सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसला : सच अउ न्याय बर डीएनए टेस्ट जरूरी हे

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Supreme Court : पिथौरा। महासमुंद जिला के बसना ब्लॉक के ग्राम पलसापाली ले जुड़े एक चर्चित पितृत्व विवाद (बाप-बेटा के विवाद) मामला मा सुप्रीम कोर्ट ह बड़े फैसला सुनाए हे। सर्वोच्च न्यायालय ह डीएनए (DNA) टेस्ट कराए के आदेश ला बरकरार रखत हुए साफ कहिथिस कि जब पितृत्व के सवाल सीधे विवाद के विषय होय अउ ओखर हल कोनो दूसर सबूत ले संभव न होय, तब न्याय बर वैज्ञानिक जांच जरूरी हो जाथे।

ये मामला कतको बछर ले अदालत मन मा लंबित रहिस। विवाद ह एक युवक डहर ले दायर दीवानी मामला ले जुड़े हे, जेमा ओहा अपन आप ला संबंधित मनखे के बेटा बतात हुए संपत्ति मा हिस्सा मांगे रहिस। युवक के महतारी के कहना रहिस कि बछर 1999 मा दूनों के बीच संबंध बने रहिस, जेखर बाद युवक के जनम होईस। दूसर डहर, ओ मनखे ह लगातार ओला अपन बेटा माने ले इंकार करत रहिस।

ये मामला मा पहिली घलो निचली अदालत अउ ओखर बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ह डीएनए टेस्ट कराए के आदेश दे रहिस। हाईकोर्ट के कहना रहिस कि पितृत्व के सही फैसला डीएनए टेस्ट के बिना संभव नई हे। एखर बाद ये मामला ला सुप्रीम कोर्ट मा चुनौती दिए गए रहिस।

निजता के अधिकार ले बड़े हे न्याय: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट मा अपीलकर्ता डहर ले तर्क दिए गिस कि कोनो मनखे ला जबरन डीएनए सैंपल दे बर मजबूर नहीं करे जा सके, ये ह निजता के अधिकार (Privacy) के उल्लंघन हे। वहीं, पीड़ित पक्ष के कहना रहिस कि सच सामू लाए बर डीएनए टेस्ट ही एकमात्र रद्दा हे।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ह कहिथिस कि भारत मा डीएनए टेस्ट आम तौर पर नहीं कराए जाए, सबर दिन जब मामला मा कोनो दूसर ठोस सबूत न होय, तब अदालत वैज्ञानिक जांच के आदेश दे सकत हे। कोर्ट ह मानिस कि अगर ये सवाल के जवाब नहीं मिलिस, तो युवक अपन हक अउ संपत्ति के अधिकार ले वंचित हो जाही। निजता के अधिकार ऊपर टिप्पणी करत कोर्ट ह कहिथिस कि निजता के अधिकार ह पूर्ण नहीं होवय, न्याय बर ओला दूसर पक्ष के अधिकार मन के साथ संतुलित करे जा सकत हे।

सुप्रीम कोर्ट ह अपील ला खारिज करत हुए संबंधित दीवानी न्यायालय ला डीएनए टेस्ट के तारीख तय करके आगे के कार्रवाई करे के निर्देश दे हे। ये मामला मा पीड़ित पक्ष डहर ले अभिनव श्रीवास्तव अउ स्थानीय वकील बजरंग अग्रवाल के बेटी वकील बरखा अग्रवाल ह पैरवी करिन।

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OneCG एक्सक्लूसिव रिपोर्ट OneChhattisgarh.Com
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