Stock Market August 24: ईरान-अमेरिका संकट से बिगड़ा मार्केट का मूड, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान पर बंद

Stock Market August 24: मुंबई/नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में चालू सप्ताह के पहले दिन 24 अगस्त को गिरावट रही। सेंसेक्स 172 अंक की गिरावट के साथ 77,369 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 33 अंक की गिरावट रही, ये 24,219 पर बंद हुआ। शुरुआती कारोबार में बाजार की चाल को लेकर उम्मीद बनी हुई थी, लेकिन अंत तक बिकवाली का दबाव हावी हो गया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार के कमजोर रुख के बीच PSU बैंक शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दिया।
1970 शेयर चढ़े, 2278 में गिरावट
बाजार में गिरावट के बावजूद सभी शेयरों में बिकवाली नहीं रही। सोमवार को करीब 1,970 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,278 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं 199 शेयरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और अदानी पोर्ट्स प्रमुख गिरने वाले शेयर रहे। दूसरी ओर हिंडाल्को, JSW स्टील, डॉ. रेड्डीज़ लैब्स, टाटा स्टील और HCL टेक्नोलॉजीज में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
PSU बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आई, एनर्जी, मेटल और रियल्टी को छोड़कर ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। PSU बैंक इंडेक्स करीब 1 फीसदी गिरा, जबकि प्राइवेट बैंक, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 0.3 से 0.5 फीसदी तक की गिरावट रही। हालांकि, मेटल शेयरों में मजबूती ने बाजार को कुछ सहारा दिया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.13 फीसदी ऊपर रहा, जबकि स्मॉल कैप इंडेक्स 0.26 फीसदी नीचे बंद हुआ।
ईरान-अमेरिका तनाव ने बढ़ाई चिंता
बाजार के मूड पर सबसे बड़ा असर अभी भी अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का है। निवेशकों को आशंका है कि इस तनाव के लंबे समय तक जारी रहने से कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान पर लगाए गए नए अमेरिकी प्रतिबंधों को इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अब निर्णायक दौर में पहुंच रहा है।
92 डॉलर के ऊपर ब्रेंट क्रूड
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 2 फीसदी गिरा, लेकिन इसकी कीमत फिर भी 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है। इससे महंगाई, राजकोषीय स्थिति, आर्थिक विकास और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है।
Source: Asian News Bharat


