छत्तीसगढ़ के स्कूल मन मा ठेठरी-खुरमी के पढ़ाई, 100 विषय मा पाठ्यक्रम तैयार
Chhattisgarh Education : रायपुर। अब छत्तीसगढ़ के स्कूल मन मा सिरिफ सामान्य ज्ञान के रूप मा नई, बल्कि अपन माटी, बोली, तिहार-परब, कला अउ लोकजीवन ला सीधे पढ़ाई ले जोड़े के तैयारी चलत हे। कक्षा 6वीं ले 12वीं तक के लइका मन बर करीब 100 विषय मा अइसन पाठ तैयार करे जावत हे, जेमा हमर छत्तीसगढ़ के असली पहचान दिखेही। एमा ठेठरी-खुरमी, फरा-मुठिया ले लेके पंथी नाच, डोकरा कला अउ बस्तर दशहरा तक ला शामिल करे जाही।
100 कलाविद अउ विशेषज्ञ लिखत हवयं संस्कृति के पाठ
ए पूरा काम ला आर्ट रिपोजिटरी के तहत करे जावत हे। प्रदेशभर के साहित्यकार, संस्कृतिविद, शोधकर्ता, विषय विशेषज्ञ अउ जनसंचार विशेषज्ञ मन ला एक ठन मंच मा लाए गे हे। ए विशेषज्ञ मन लइका मन के समझ के हिसाब ले पाठ तैयार करत हवयं, ताकि संस्कृति ला घोकना न परै, बल्कि लइका मन ओला समझ सकें अउ महसूस कर सकें।
तीन दिन के कार्यशाला मा बनत हे खाका
राज्य शैक्षिक अनुसंधान अउ प्रशिक्षण परिषद (SCERT) मा 3 दिन के अवासी कार्यशाला चलत हे। विषय मन के समीक्षा अउ संशोधन के काम पूरा करे जावत हे। एकर संग-संग हर विषय मा 5 ले 10 मिनट के छोटे फिल्म (शॉर्ट फिल्म) मन के स्क्रिप्ट घलो बनाए जावत हे, ताकि लइका मन ला पढ़े के संग-संग देखे के घलो मौका मिलै।
महापुरुष, तिहार अउ खान-पान के पढ़ाई
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महापुरुष अउ संत: गुरु घासीदास, गहिरा गुरु, शबरी माता, राजा चक्रधर, तीजन बाई, विनोद कुमार शुक्ल, मिनीमाता, पं. सुंदरलाल शर्मा अउ वीर नारायण सिंह जइसे विभूति मन के योगदान ला पढ़ाए जाही।
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परब अउ लोकनृत्य: हरेली, नवाखाई, बस्तर दशहरा, छेरछेरा, तीजा-पोला के संग पंथी, राउत नाचा, गेड़ी, ककसाड़ अउ सुवा नाच के जानकारी दे जाही।
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खान-पान अउ शिल्प: ठेठरी, खुरमी, फरा, अंगाकर रोटी, चापड़ा चटनी अउ पपची जइसे व्यंजन अउ डोकरा आर्ट, टेराकोटा, गोदना कला ला घलो पाठ्यक्रम मा जगह मिलही।



