ब्लैकलिस्टेड कंपनी ला PWD बिजली शाखा दे दीस 13 करोड़ के ठेका, झूठा शपथपत्र ले होय हे बड़का खेल!
Tender Scam Raipur : रायपुर। लोक निर्माण विभाग (PWD) के बिजली अऊ यांत्रिकी शाखा में एक बड़का गड़बड़ी के खुलासा होय हे। बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड डाहर ले पांच बछर बर अपात्र अऊ ब्लैकलिस्ट करे गय कंपनी ‘मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर’ ला विभाग ह करीब 13 करोड़ रूपया के ठेका बांट दीस। कंपनी ह टेंडर पाय बर झूठा शपथपत्र जमा करे रहीस, जेला विभागीय अधिकारी मन आंखी मूंद के मान घलो लेत रहीन।
दस्तावेज मन ले पता चले हे कि कंपनी के मालिक ह शपथपत्र में दावा करे रहीस कि ओकर फर्म कतहु घलो ब्लैकलिस्ट या प्रतिबंधित नई हे। जबकि असलियत यहे हे कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी ह बछर 2023 में ए कंपनी के निविदा सुरक्षा राशि ला जब्त करके ओला ब्लैकलिस्ट कर दे रहीस अऊ निविदा प्रक्रिया ले बाहिर निकाल दे रहीस।
अपात्र-ब्लैकलिस्ट कंपनी ला कहां-कहां अऊ कतेक के ठेका मिलिस?
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रायपुर, धमतरी अऊ कुरूद क्षेत्र: आईडी – CGeR07424 के तहत बिजली लाइन शिफ्टिंग अऊ विद्युतीकरण के बूता, जेकर कुल राशि लगभग 6 करोड़ रूपया हे।
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बिलासपुर क्षेत्र: खेल परिसर अऊ बिजली नवीनीकरण के बूता, जेकर कुल राशि लगभग 4.87 करोड़ रूपया (करीब 5 करोड़) हे।
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नवा रायपुर अऊ महासमुंद क्षेत्र: सड़क चौड़ीकरण के बेरा बिजली लाइन शिफ्टिंग के बूता, जेकर कुल राशि लगभग 2.15 करोड़ रूपया हे।
टेंडर नियम के उड़िस धज्जी
निविदा के सरत में साफ-साफ लिखे राहिस कि ब्लैकलिस्टेड या डिबार ठेकेदार ला कतहु घलो काम नई दियॉ जाय। ओकर बाद घलो कंपनी ला बड़का काम सौंप दे गीस। स्टांप पेपर में झूठा शपथपत्र देना जालसाजी, धोखाधड़ी अऊ झूठी गवाही के अपराध आय, जेमा 3 ले 7 बछर तक के जेल अऊ जुर्माना के नियम हे।
अधिकारी मन के का कहना हे?
ए मामला में पीडब्ल्यूडी बिजली शाखा के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर सुरेश भूप्पल ह कीन—
“बगैर जानकारी के मैं कुछु नई कह सकंव कि फर्म ब्लैकलिस्टेड हे कि नई। दूसर विभाग में ब्लैकलिस्ट होय के जानकारी हमन ला कइसे होही? कंपनी मालिक झूठा शपथपत्र बर फंसी। ओकर ऊपर नियम के मुताबिक कार्रवाई होही।”
वही विभाग के ईएनसी वीके भतपहरी के कहना हे—
“टेंडर के बूता नियम के आधार पर होथे। सबो दस्तावेज ला देखे जाथे। जइसन जानकारी मिलत हे, ए मामला के जांच करवा लेथन। जो घलो दोषी पाई जाही, जांच रिपोर्ट के आधार पर ओकर ऊपर कार्रवाई करे जाही।”
सवाल के घेरा में विभाग
अब सबले बड़का सवाल ये उठत हे कि जब ब्लैकलिस्टेड कंपनी के जानकारी विभाग ला पहली ले रहीस, तब घलो काम काबर दियॉ गीस? दस्तावेज जांचे के प्रक्रिया कहां फेल हो गीस? का एमा अधिकारी अऊ ठेकेदार के बीच कऊनो बड़का मिलीभगत हे?



