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Gyanesh Kumar Form 6 Voter: SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग की बड़ी बैठक, Form-6 और ECINET पर आयोग ने दिया स्पष्टीकरण, अगर आपका नाम भी छूट गया तो पढ़ें पूरी खबर

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Gyanesh Kumar Form 6 Voter: SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग की बड़ी बैठक, Form-6 और ECINET पर आयोग ने दिया स्पष्टीकरण, अगर आपका नाम भी छूट गया तो पढ़ें पूरी खबर

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40330-election-commission Gyanesh Kumar Form 6 Voter: SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग की बड़ी बैठक, Form-6 और ECINET पर आयोग ने दिया स्पष्टीकरण, अगर आपका नाम भी छूट गया तो पढ़ें पूरी खबर

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मौजूदगी में शनिवार, 26 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग की अहम बैठक हुई। SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर चल रही चर्चा के बीच आयोग ने कई महत्वपूर्ण फैसलों और अपने रुख को स्पष्ट किया।

बैठक में आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि Form-6 के साथ दिए जाने वाले डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट बरकरार रख चुका है।

इसके अलावा SIR नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को आसान करने, दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की समयसीमा बढ़ाने और ECINET की समीक्षा के लिए समिति बनाने जैसे फैसले लिए गए।

SIR नोटिस वालों को अब क्या सुविधा मिलेगी?

चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि SIR के दौरान जिन मतदाताओं को नाम मैप न होने या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस मिला है, उन्हें सामान्य तौर पर ERO के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होना पड़ेगा।

ऐसे मामलों में BLO मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे। इसके बाद ERO दस्तावेजों के आधार पर मामले पर निर्णय लेगा।

आयोग के मुताबिक, सुनवाई केवल असाधारण परिस्थितियों में जरूरी होगी और जहां संभव हो, उसे ऑनलाइन कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मतदाता की ओर से परिवार का कोई वयस्क सदस्य भी अधिकृत होकर सुनवाई में शामिल हो सकेगा।

Form-6 को लेकर आयोग ने क्या कहा?

Form-6 को लेकर चल रही चर्चा के बीच चुनाव आयोग ने अपने रुख को दोहराया है। आयोग ने कहा कि SIR के दौरान Form-6 के साथ दिया जाने वाला डिक्लेरेशन सुप्रीम कोर्ट से बरकरार रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले में भी SIR प्रक्रिया और नए मतदाताओं के लिए Form-6 के साथ डिक्लेरेशन की व्यवस्था का उल्लेख है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR की अवधि के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे।

SIR पूरा होने के बाद छूटे मतदाताओं का क्या होगा?

चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है।

आयोग के मुताबिक, जिन मतदाताओं का नाम SIR के दौरान या उसके बाद सूची में शामिल नहीं हो पाया है, वे निरंतर अपडेटेशन के तहत संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकते हैं। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी शामिल हैं।

CEO, DEO और ERO को ऐसे छूटे हुए तथा नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी दावे-आपत्तियों की समयसीमा

आयोग ने दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी है। इनके निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर तक बढ़ाई गई है।

वहीं, महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 और उनके निपटारे की तारीख 10 नवंबर 2026 तक की गई है।

ECINET की होगी स्वतंत्र समीक्षा

ECINET को लेकर भी आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इसकी समीक्षा एक वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता वाली समिति करेगी, जिसमें IIT/IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।

समिति यह देखेगी कि सिस्टम संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं। आयोग ने कहा है कि IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहल आगे से अधिकारियों की समिति में चर्चा के बाद आयोग के सामने मंजूरी के लिए रखी जाएगी।

कैबिनेट सचिव को भेजी चिट्ठी पर आयोग की सफाई

चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजी गई चिट्ठी को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया। आयोग के मुताबिक, यह पत्र किसी चुनाव आयोग की IT नीति या IT डिवीजन से जुड़े नीतिगत फैसले को लेकर नहीं था।

यह आयोग में प्रतिनियुक्त एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। आयोग ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-वितरण संबंधी आदेश दो चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किए गए और IT डिवीजन की निगरानी डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर से कभी वापस नहीं ली गई।

बैठकों और अधिकारियों को लेकर भी फैसले

चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली से जुड़े कुछ फैसले भी लिए हैं। आयोग के मुताबिक अब उसकी बैठकों का एजेंडा पहले जारी किया जाएगा और बैठकों की कार्यवाही भी जारी की जाएगी। अधिकारियों की वार्षिक APAR रिपोर्ट हर साल 31 दिसंबर तक पूरी करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।

इसके अलावा अधिकारियों की आधिकारिक विदेश यात्राओं के लिए चुनाव आयोग की मंजूरी जरूरी होगी। आयोग ने यह भी कहा कि आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

गोवा में BLO घर-घर जाकर कर रहे मदद

आयोग ने गोवा का उदाहरण देते हुए बताया कि SIR में छूटे मतदाताओं तक पहुंचने के लिए BLO घर-घर जाकर Form-6 भरवा रहे हैं। आयोग के मुताबिक, ऐसे 97 मतदाताओं में से 81 ने Form-6 भर दिया है।

Source: Nishaanebaz

Nishaanebaz
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Nishaanebaz
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