“EV चार्जिंग सिस्टम में एकरूपता से बढ़ेगा देश का ई-मोबिलिटी भविष्य: गडकरी”
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतों और प्रदूषण को कम करने की ज़रूरत ने उपभोक्ताओं का ध्यान ई-वाहनों की ओर खींचा है। लेकिन इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती है चार्जिंग सिस्टम की असमानता। अलग-अलग कंपनियों द्वारा बनाए गए चार्जिंग पोर्ट और तकनीकी भिन्नताओं के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कंपनियों से अपील की है कि EV चार्जिंग सिस्टम को स्मार्टफोन चार्जर की तरह समान बनाया जाए।
गडकरी का मानना है कि अगर चार्जिंग सिस्टम में एकरूपता लाई जाती है, तो उपभोक्ताओं को सुविधा मिलेगी और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी सरल होगी। आज मोबाइल फोन चार्जर का उदाहरण हमारे सामने है। पहले हर कंपनी का चार्जिंग पोर्ट अलग होता था, जिससे लोगों को कई तरह के चार्जर रखने पड़ते थे। लेकिन जब चार्जर का मानकीकरण हुआ तो उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली। ठीक उसी तरह अगर EV चार्जिंग सिस्टम एक जैसा हो जाएगा तो देशभर में किसी भी जगह चार्जिंग आसान होगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह की समानता के बिना निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों को अपनाने और आर्थिक व्यवहार्यता में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। यह विचार उन्होंने ‘रॉकी माउंटेन इंस्टिट्यूट’ (RMI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा आयोजित एक उद्योग गोलमेज सम्मेलन में व्यक्त किए।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि EV चार्जिंग सिस्टम का मानकीकरण केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह हर उपभोक्ता के लिए एक बड़ी सुविधा होगी। इससे न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ेगा बल्कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के लक्ष्य को भी गति मिलेगी।




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