आयोग मन के काम सिफारिश करना, हाईकोर्ट कहिस- अदालत बनके फैसला मत सुनाव
Chhattisgarh High Court : रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ह राज्य के वैधानिक आयोग मन के अधिकार ला लेके एक जरूरी बात कहे हे। कोर्ट ह साफ कर दिस कि महिला आयोग होय या पिछड़ा वर्ग आयोग, ए मन के काम शिकायत के जांच करके कार्रवाई बर सिफारिश करना हे। आयोग खुद ला अदालत समझके निजी विवाद म अंतिम फैसला नई दे सकय।
कोर्ट ह कहिस कि आयोग किसी मामला म पक्षकार मन के कानूनी अधिकार, कऊनो के देनदारी या मुआवजा के रकम ला अंतिम रूप ले तय नई कर सकय। ए टिप्पणी महिला आयोग अउ पिछड़ा वर्ग आयोग से जुड़े दू अलग-अलग मामला के सुनवाई के दौरान करे गे हे। कोर्ट ह दुनों मामला म आयोग के कार्रवाई ला रद्द कर दिस।
महिला आयोग ह मुआवजा बढ़ाय के आदेश दे दीस
पहिली मामला GAIL के रायपुर-भाठागांव गैस पाइपलाइन से जुड़ा रहिस। जमीन के इस्तेमाल अउ मुआवजा ला लेके विवाद चलत रहिस। GAIL के तरफ ले कोर्ट म कहे गे रहिस कि जमीन अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया पूरा हो चुके हे अउ मुआवजा के निर्धारण भी हो गे हे।
ए मामला म राज्य महिला आयोग ह दखल देत हुए मुआवजा बढ़ाय अउ ओकर भुगतान करे के निर्देश दे डारे रहिस। आयोग ह पाइपलाइन बिछाय के काम रोके के बात घलो कही रहिस। साथे GAIL के महाप्रबंधक सुरेश बाबू अउ ज्वाइंट कलेक्टर रितु हेमनानी के खिलाफ दीवानी अउ आपराधिक कार्रवाई के चेतावनी घलो दे गे रहिस।
मामला जब हाईकोर्ट पहुंचिस, त जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद के बेंच ह महिला आयोग के 19 जून 2025, 6 जुलाई 2026 अउ 8 जुलाई 2026 के तीनों आदेश ला रद्द कर दिस।
कोर्ट ह कहिस कि महिला आयोग के पास जमीन अधिग्रहण, मुआवजा तय करे या निजी पक्ष मन के कानूनी अधिकार के न्यायिक फैसला करे के अधिकार नई हे। आयोग शिकायत के आधार म कार्रवाई के मांग या सिफारिश जरूर कर सकथे, फेर पक्षकार मन के अधिकार के आखिरी फैसला नई कर सकय।
21 लाख के हार्वेस्टर मामला म पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्रवाई रद्द
दूसर मामला दुष्यंत प्रकाश नाग अउ छत्तीसगढ़ सरकार से जुड़ा रहिस। दुष्यंत प्रकाश नाग ह हार्वेस्टर खरीदे बर 31 जुलाई 2020 ला 30 हजार रुपिया एडवांस दे रहिस। एखर बाद 9 सितंबर 2020 ला 20.70 लाख रुपिया के बाकी रकम घलो जमा कर दिस।
आरोप रहिस कि पूरा पैसा देय के बाद घलो ओकर ला हार्वेस्टर नई मिलिस। शिकायत के बाद मामला पिछड़ा वर्ग आयोग तक पहुंचिस। आयोग ह संबंधित डीलर कमला मोटर्स के संचालक से मुआवजा वसूल करे के सिफारिश कर दीस।
कमला मोटर्स ह आयोग के कार्रवाई ला हाईकोर्ट म चुनौती दिस। मामला म चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा अउ जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के डिवीजन बेंच ह सुनवाई करिस।
कोर्ट ह कहिस कि आयोग ला जांच करे बर कुछ अधिकार जरूर मिले हे, फेर ए अधिकार के मतलब ये नई कि आयोग सिविल कोर्ट बन जाही। निजी पक्ष मन के बीच अधिकार, देनदारी या मुआवजा के संबंध म न्यायिक फैसला करे के अधिकार आयोग के पास नई हे।
हाईकोर्ट ह ए आधार म एकलपीठ के फैसला ला बरकरार रखिस, जेमे आयोग के कार्रवाई ला निरस्त कर दे गे रहिस। कोर्ट ह अपील ला घलो खारिज कर दिस।
हाईकोर्ट ह आयोग मन के अधिकार के सीमा बताइस
दुनों मामला के सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के बात साफ हे कि आयोग मन शिकायत सुन सकथें, जांच कर सकथें अउ संबंधित विभाग ला कार्रवाई बर सिफारिश भेज सकथें। फेर आयोग खुद अदालत के भूमिका म आके अंतिम फैसला नई सुना सकय।
खास करके जमीन, मुआवजा, संपत्ति, पैसा के देनदारी या निजी पक्ष मन के कानूनी अधिकार से जुड़े विवाद के अंतिम फैसला न्यायिक संस्था ही कर सकथे। हाईकोर्ट के ए टिप्पणी ले वैधानिक आयोग मन के अधिकार अउ काम के सीमा साफ हो गे हे।



