छत्तीसगढ़ मं 42 फीसदी खून के कमी, निजी अस्पताल मन एक यूनिट बर लेवत हें 4 हजार तक
Blood Shortage in Chhattisgarh : रायपुर। छत्तीसगढ़ मं जरूरत के हिसाब ले खून के उपलब्धता कम होगे हे। प्रदेश मं करीब 42 फीसदी ब्लड के कमी बताय जा रहिस। जरूरत के मुकाबले सिरिफ 58 फीसदी खून स्वैच्छिक रक्तदान ले मिल पावत हे। ए कमी के चलते मरीज अऊ उनके परिवार के दिक्कत बढ़त जावत हे। कुछ निजी अस्पताल मन मं एक यूनिट खून बर ढाई हजार ले 4 हजार रुपिया तक लेय के शिकायत घलो सामने आवत हे।
साल मं 3 लाख यूनिट खून के जरूरत
प्रदेश मं हर साल करीब 3 लाख यूनिट खून के जरूरत पड़थे, फेर 1.75 लाख ले 2 लाख यूनिट तक ही उपलब्ध हो पाथे। खून के कमी ला दूर करे बर स्वास्थ्य विभाग ह 17 सितंबर ले 2 अक्टूबर तक विशेष रक्तदान पखवाड़ा चला रहिस। ए अभियान के संदेश हे—मानवता के एक बूंद, रक्त दव अऊ जिंदगी बचाव।
मरीज मन ला डोनर खोजे मं होवत हे परेशानी
खून के कमी के असर सबसे जियादा इमरजेंसी मरीज, सिकलसेल, हीमोफीलिया अऊ नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरूरत वाले मरीज मन ऊपर पड़त हे। कुछ निजी अस्पताल मन मं मरीज के डिस्चार्ज के बेरा डोनर बुलाय के बात घलो सामने आवत हे। जरूरत के बेरा खून नइ मिल पाय ले मरीज के परिवार वाले मन ला एक अस्पताल ले दूसर अस्पताल तक भटकना पड़थे।
रायपुर मं सरकारी ब्लड बैंक गिनती के
राजधानी रायपुर मं दू सरकारी ब्लड बैंक संचालित हें। एक आंबेडकर अस्पताल के मॉडल ब्लड बैंक अऊ दूसर डीकेएस परिसर मं रेडक्रॉस सोसाइटी के ब्लड बैंक हे। राजधानी मं 20 ले जियादा ब्लड बैंक हें, जबकि प्रदेश भर मं 120 ले जियादा ब्लड बैंक चलत हें। रायपुर मं करीब 200 छोटे-बड़े अस्पताल संचालित होवत हें। एखर चलते आपातकाल के बेरा खून के मांग अऊ उपलब्धता मं अंतर साफ नजर आथे।
सिकलसेल मरीज मन ला नियमित खून के जरूरत
छत्तीसगढ़ मं सिकलसेल बीमारी घलो ब्लड के मांग बढ़ाय के एक बड़का कारण हे। प्रदेश मं करीब 30 लाख लोग सिकलसेल ले प्रभावित बताए जाथें अऊ 3 लाख ले जियादा मरीज हें। बस्तर अऊ सरगुजा संभाग के गंभीर मरीज मन ला कई बेर बेहतर इलाज बर रायपुर अऊ बिलासपुर आना पड़थे।
महिला अऊ बच्चा मन मं एनीमिया के समस्या
प्रदेश मं एनीमिया घलो एक बड़का समस्या बने हे। उपलब्ध आंकड़ा के मुताबिक बड़ी संख्या मं महिला अऊ बच्चे खून के कमी ले जूझत हें। सिकलसेल अऊ एनीमिया जइसन बीमारी वाले मरीज मन ला कई बार नियमित इलाज के संग ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरूरत पड़थे। एखर से स्वैच्छिक रक्तदान के जरूरत अउ बढ़ जाथे।
स्वस्थ लोग कर सकथें रक्तदान
स्वस्थ व्यक्ति, जेनके उमर 18 ले 65 साल के बीच होवय अऊ वजन 45 किलो ले जियादा होवय, नियम के मुताबिक रक्तदान कर सकथे। विशेषज्ञ मन के कहना हे कि स्वस्थ व्यक्ति के रक्तदान करे ले शरीर मं खून के नया कोशिका बने के प्रक्रिया चलत रहिथे। सिकलसेल, हीमोफीलिया अऊ दूसर गंभीर बीमारी के मरीज मन बर दान करे गे खून बहुत काम के साबित होथे।



