CAFE-3 ड्राफ्ट में छोटे कारों को मिलेगी राहत: सरकार ने उत्सर्जन मानकों में ढील का प्रस्ताव रखा, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों को भी बढ़ावा मिलेगा
नई दिल्ली. देश में कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE-3) के नए ड्राफ्ट प्रस्ताव पर चर्चा तेज हो गई है। सरकार ने छोटे इंजन वाली कारों को उत्सर्जन मानकों में 3 g/km तक की ढील देने का सुझाव दिया है। यह प्रावधान 2027 से लागू होने वाले नियमों का हिस्सा होगा।
क्या है प्रस्ताव?
- छोटी कारें (≤1200cc, ≤4000mm, ≤909kg) अपने घोषित CO₂ परफॉर्मेंस से +3 g/km की राहत ले सकेंगी।
- किसी भी मॉडल को अधिकतम 9 g/km तक की छूट एक रिपोर्टिंग अवधि में मिलेगी।
- EVs, हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए सुपर-क्रेडिट सिस्टम रखा गया है, यानी एक EV को रिपोर्टिंग में 3 गाड़ियों के बराबर माना जाएगा।
- कंपनियों को Fleet Pooling की अनुमति भी होगी, यानी तीन तक निर्माता मिलकर अपने उत्सर्जन का औसत निकाल सकेंगे।
क्यों लाया गया बदलाव?
- छोटे कार सेगमेंट की बिक्री लगातार गिर रही है।
- बढ़ती कीमतों और SUV ट्रेंड की वजह से इस श्रेणी की मांग कम हो गई है।
- Maruti Suzuki जैसे निर्माताओं का मानना है कि राहत मिलने से छोटे कार फिर से आकर्षक बनेंगी और आम जनता के लिए किफायती विकल्प बने रहेंगे।
विरोध भी तेज
Tata Motors, Mahindra और Toyota जैसे बड़े निर्माता इस प्रस्ताव के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि इससे CO₂ कटौती की रफ्तार धीमी होगी और उद्योग पर असमान दबाव पड़ेगा। पर्यावरण संगठनों का तर्क है कि ज्यादा छूट देने से ग्रीन ट्रांजिशन की स्पीड कम हो जाएगी।
आम लोगों के लिए असर
कार की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रह सकती हैं। कंपनियां छोटे कार सेगमेंट में नई टेक्नोलॉजी जैसे स्टार्ट-स्टॉप, ट्यूबलेस टायर, हल्के इंजन लाने के लिए प्रेरित होंगी। लंबे समय में EV और हाइब्रिड गाड़ियों का विकल्प भी बढ़ेगा।




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