बिलासपुर हाई कोर्ट के बड़का फैसला : पति-पत्नी के बीच के झगड़ा ला आत्महत्या बर उकसाना नहीं माने जा सकय
बिलासपुर. बिलासपुर हाई कोर्ट ह आत्महत्या बर उकसाय (धारा 306 आईपीसी) के एक मामला में निचली अदालत के सुनाए 4 साल के सजा ला रद्द कर दीस हे. जस्टिस रजनी दुबे के सिंगल बेंच ह कहिस कि पुलिस अउ सरकारी पक्ष ए बात ला साबित करे में नाकाम रहिन हें कि पति ह अपन पत्नी ला जान देय बर उकसाइस रिहिस.
का रिहिस पूरा मामला?
ये मामला जांजगीर-चांपा जिला के बलौदा थाना क्षेत्र के आय. आरोपी बसंत कुमार सतनामी के ऊपर आरोप रिहिस कि ओखर पत्नी टिकैतिन बाई ह बिहाव के 4 साल बाद ओखर प्रताड़ना ले तंग आके खुदकुशी कर लीस. जांजगीर के निचली अदालत ह 31 जुलाई 2007 के बसंत ला दोषी मानत हुए 4 साल के जेल अउ 500 रूपया जुर्माना के सजा सुनाय रिहिस.
हाई कोर्ट ह काबर रद्द करिस सजा?
आरोपी ह ए फैसला ला हाई कोर्ट में चुनौती दीस, जिहां सुनवाई के दौरान कतकोन जरूरी बात मन आगू आईन:
मौत के कारण साफ नई हे: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के सही कारण पता नहीं चलिस. डॉक्टर ह अपन गवाही में कहिस कि मौत ह उल्टी-दस्त या एस्फिक्सिया (दम घुटना) ले घलो हो सकत हे.
गवाह मन के बात अलग-अलग: गवाह मन के बयान एक-दूसर ले मेल नहीं खात रिहिस. कोनो ह जहर खाय के बात कहिस, त कोनो ह दारू पियय के अउ कोनो ह बीमारी ले मौत होय के बात कहिस.
सबूत के कमी: कोर्ट ह कहिस कि सिरीफ पति-पत्नी के बीच होय वाला सउधिन कलह या झगड़ा ला आत्महत्या बर उकसाना नहीं माने जा सकय, जब तक कि उकसाय के कोनो पक्का सबूत न मिलय.
हाई कोर्ट ह सुप्रीम कोर्ट के फैसला मन के हवाला देवत हुए कहिस कि धारा 306 के तहत सजा देवय बर ‘आपराधिक मंशा’ अउ ‘सिक्का-बंद सबूत’ होना जरूरी हे. ए मामला में अइसन कुछु नहीं मिलिस, जेकर सेती कोर्ट ह आरोपी ला बरी कर दीस अउ सजा ला निरस्त कर दीस.



