बिलासपुर हाई कोर्ट : सिम्स के बदहाली ऊपर सरकार ले पूछिस- ‘कबे तक टेंडर-टेंडर खेलहू, मरीज मन के इलाज कइसे होही?’
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) के दुर्दशा अउ अव्यवस्था ऊपर बिलासपुर हाई कोर्ट ह कड़ा रुख अपनाए हे। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा अउ जस्टिस रविंद्र अग्रवाल के डिवीजन बेंच ह सरकार ले सीधा सवाल पूछिस हे कि आखिर कबे तक टेंडर के प्रक्रिया चलत रही? अउ अइसन म अऊत-जावत मरीज मन के इलाज कइसे होही? कोर्ट ह ए मामला म चीफ सिकरेट्री (मुख्य सचिव) ल सपथ पत्र के साथ जवाब देबड़ कहे हे कि नई मशीन मन कबे तक लग जाही अउ काम करना सुरु कर दिही।
जनहित याचिका के सुनवाई म CGMSC ह बताइस कि सिम्स बर नई मशीन खरीदे के टेंडर म 5 झन बिडर सामिल होय हें। 31 ठन मशीन म ले अभी तक सिर्फ 7 बर ही टेंडर पास हो पाए हे, बाकी बर अभी घलो कसरत जारी हे। ए बात ऊपर बेंच ह नाराजगी जतावत कहिस कि टेंडर के चक्कर म मरीज मन ल इलाज ले वंचित नई रखे जा सकय। मशीन मन ल जल्दी लगाके इलाज सुरु करना जरूरी हे।
डीन ह बताइस- का-का सुधार होइस
एकर ले पहिली सिम्स के डीन ह कोर्ट ल बताय रहिस कि मरीज मन के भीड़ ल देखत दवाई बांटे के सेंटर ल बढ़ा दे गे हे, जेकर ले अब लंबी लाइन नई लगे। लैब टेक्नीशियन मन ल घलो ट्रेनिंग दे गे हे ताकि जांच के क्वालिटी बढ़ सके। सफाई अउ सुरक्षा बर वाट्सएप ग्रुप बनाके बड़े अधिकारी मन ह खुद मानिटरिंग करत हें।
5 कैटेगरी म होही मशीन मन के खरीदी
CGMSC के एमडी ह कोर्ट ल जानकारी दिस कि मशीन मन ल 5 कैटेगरी म बांटे गे हे। नियम के मुताबिक, हर कैटेगरी म कम ले कम 3 बिडर होना जरूरी हे, तब टेंडर फाइनल होही। अगर बिडर कम होही, त फिर ले री-टेंडर करे जाही। अब ए मामला के अगली सुनवाई मार्च म होही।

