अतिथि शिक्षक मन ल हाई कोर्ट ले बड़ी राहत: ‘पुरानी सेवा ल नई भुला सकय सरकार’, 41 शिक्षक मन के पक्ष में फैसला
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ले अतिथि शिक्षक मन बर एक खुसखबरी अइसै। बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच ह 41 अतिथि शिक्षक मन के याचिका ऊपर सुनवाई करत हुए एक बड़ फैसला सुनाय हे। कोर्ट ह साफ कहि दिस हे कि जौन शिक्षक मन ह पहिली ले ईमानदारी अउ मेहनत ले अपन सेवा दे हें, ओ मन ल नवा भर्ती के बेरा नजरअंदाज नहीं करे जा सकय।
का ए पूरा मामला? ए मामला ‘एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय’ (EMRS) ले जुड़े हे। सरोज कुमार गुप्ता, अनूपा तिर्की समेत 43 झन शिक्षक मन ह हाई कोर्ट में याचिका लगाय रहिन। ओ मन के कहना रिहिस कि ओ मन साल 2016 ले 2024 के बीच अलग-अलग जिला मन में कलेक्टर अउ सहायक आयुक्त के आदेश ले नियुक्त होय रिहिन। कई साल ले ओ मन लगातार पढ़ावत आवत हें, लेकिन अब नेशनल एजुकेशन सोसायटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS) ह एक नवा विज्ञापन निकाल के पूरा देश ले आवेदन मंगा लिस। एमां जुन्ना शिक्षक मन के भविष्य अउ ओ मन के अनुभव ल तवज्जो नहीं दिये जात रिहिस।
हाई कोर्ट ह का कहिस? हाई कोर्ट ह सबो याचिका मन ल एक साथ सुनिस। कोर्ट ह अपन फैसला में कहिस कि केंद्र सरकार के भर्ती प्रक्रिया (NESTS) में घलो ए बात के निर्देश हे कि जुन्ना अतिथि शिक्षक मन के अनुभव ल महत्व देना चाहिए अउ ओ मन ल ‘वेटेज’ (अतिरिक्त अंक) दे के नियुक्ति ऊपर विचार करना चाहिए। कोर्ट ह ए घलो मानिस कि जौन शिक्षक मन ह कई साल ले सेवा दे हें, ओ मन के रोजी-रोटी ल अचानक खतरा में नहीं डारे जा सकय।
शिक्षक मन डहर ले मतीन सिद्दीकी, भरत लाल साहू, पलाश अग्रवाल अउ आन वकील मन ह पैरवी करिन। ए फैसला ले अब छत्तीसगढ़ के उन सैकड़ों शिक्षक मन ल उम्मीद जगे हे जौन एकलव्य स्कूल मन में अपन सेवा दे रहे हें।



