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‘मैं ह सदन के मान-मर्यादा ला बढ़ाय के मेहनत करेंव’, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ह सदन म अपन बात राखिन

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Om Birla Speech : नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ह सदन म वापसी के बाद सबो सांसद मन ला संबोधित करिन। पिछला कुछ दिन ले चलत अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस अउ गहमागहमी के बीच, स्पीकर बिरला ह सदन के मान-मर्यादा, संवैधानिक मूल्य अउ निष्पक्षता ऊपर जोर देवत अपन बात रखिन। ओमन साफ कहिन कि ओखर असली लक्ष्य 140 करोड़ भारतीय मन के आवाज ला मजबूती देना आय।

संविधान अउ सदन के परंपरा के जिक्र

ओम बिरला ह अपन गोठ म भारतीय संविधान के अनुच्छेद 93 के बखान करिन, जेमा लोकसभा अध्यक्ष चुने के नियम हे। ओमन कहिन कि सदन ह ओला दूसर बार ये बड़े जिम्मेदारी बर चुने हे, अउ ओखर कोसिस हमेशा ये रहिथे कि सदन के काम-काज नियम अउ निष्पक्षता ले चलय।

सहमति अउ असहमति लोकतंत्र के आधार

स्पीकर ह लोकतांत्रिक परंपरा के महत्ता बतावत कहिन:

“संसदीय लोकतंत्र म सहमति अउ असहमति दूनों के अपन जगह हे। सदन के सुघराई एही म हे कि हर सांसद अपन क्षेत्र के जनता के दुख-पीरा अउ उम्मीद ला बिना कोनो डर के यहाँ रख सकय।”

ओमन ये घलो बताइन कि ओमन हमेशा ओ सांसद मन ला घलो बोले बर बढ़ावा देथें जेमन कम गोठियाथें या संकोच करथें, ताकि आखिरी कतार म खड़े मनखे के आवाज घलो संसद तक पहुँच सकय।

अविश्वास प्रस्ताव अउ निष्पक्षता ऊपर सफाई

अभी हाल म होय घटना मन के बारे म ओम बिरला ह बताइन कि 10 फरवरी के विपक्ष डहर ले ओखर खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस देय के बाद, ओमन खुद ला सदन के कार्यवाही ले अलग कर ले रहिन। ओमन कहिन कि पिछला दो दिन म जतका घलो चर्चा होइस, चाहे वो समर्थन म होय या आलोचना म, ओमन सबो सदस्य मन के बात ला गम्भीरता ले सुनिन अउ सबो झन के आभार मानिन।

आसंदी के मर्यादा सबले ऊपर

बिरला ह जोर देके कहिन कि लोकसभा अध्यक्ष के आसंदी ह कोनो एक मनखे के नई, बल्कि एक महान संस्था अउ गौरवशाली परंपरा के प्रतीक आय। ओमन जुन्ना अध्यक्ष मन के काम ला सुरता करत संकल्प लिन कि ओमन सदन के मान-मर्यादा ला अउ ऊँचा ले जाय बर हमेशा मिहनत करहीं।

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