“दुनिया का पहला 6G चिप तैयार—रिमोट एरिया में सेवा गति 5,000 गुना तक बढ़ाने का दावा”
चीन ने 1 सितंबर 2025 को एक अत्यंत उन्नत और बहुआयामी “ऑल-फ्रीक्वेंसी” 6G चिप का अनावरण किया, जिसे पीकिंग यूनिवर्सिटी और सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ़ हॉन्ग कॉन्ग के शोधकर्ताओं ने मिलकर विकसित किया है । इस चिप का आकार बेहद कॉम्पैक्ट है—लगभग 11 mm × 1.7 mm—फिर भी यह 0.5 GHz से लेकर 115 GHz तक पूरे वायरलेस स्पेक्ट्रम पर काम करने में सक्षम है ।
इस चिप की सबसे अहम विशेषता इसकी अद्वितीय गति है—यह मोबाइल इंटरनेट स्पीड को 100 Gbps तक ले जा सकती है । इतने उच्च डेटा दर पर, 50 GB की HD/8K फिल्म सेकंडों में डाउनलोड की जा सकती है ।
इसके अतिरिक्त, यह तकनीक ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट स्पीड को मौजूदा स्तर से 5,000 गुना तक बढ़ाने का दावा करती है । इस चिप से उच्च-आवृत्ति (mmWave, टेराहर्ट्ज) और निम्न-आवृत्ति (माइक्रोवेव) बैंड्स के बीच स्वचालित और निर्बाध स्विचिंग संभव हो पाता है—जिससे दूरदराज क्षेत्रों में भी विश्वसनीय और तेज़ नेटवर्क उपलब्ध हो सकता है ।
इस उपलब्धि को एक बड़ी तकनीकी छलांग के रूप में देखा जा रहा है, जो डिजिटल विभाजन (digital divide) को कम करने में मददगार सिद्ध हो सकती है—विशेषकर जहां अभी तक इंटरनेट की पहुँच बेहद सीमित है ।
चुनौतियाँ और चिंताएँ: हालांकि इस चिप की क्षमताएँ प्रभावशाली हैं, कुछ विशेषज्ञ यह भी संकेत दे रहे हैं कि 6G उच्च-फ्रीक्वेंसी बैंड्स का उपयोग होने से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की संभावना बढ़ सकती है, जिससे मानव स्वास्थ्य पर प्रश्नचिह्न लग सकते हैं । इसके अलावा, जैसे जैसे अधिक डिवाइसेस एक साथ जुड़े, साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को लेकर भी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं ।




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