छत्तीसगढ़ में 6 नए मेडिकल कॉलेज मंजूर, स्वास्थ्य सेवाओं पर CM साय का बड़ा निर्देश
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, अस्पतालों में आवश्यक दवाइयों और जांच की उपलब्धता तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने पर राज्य सरकार ने जोर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रदेश में छह नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति, 25 नए डायलिसिस केंद्र शुरू करने, एंबुलेंस सेवाओं को मजबूत बनाने और त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की सघन जांच के मुद्दों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बैठक में स्वास्थ्य सेवाएं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, चिकित्सा शिक्षा, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन, आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार, आवश्यक दवाइयां, जांच और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं की गुणवत्ता और अंतिम व्यक्ति तक उनकी पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हुआ है, लेकिन जहां चिकित्सकों, विशेषज्ञों, स्वास्थ्य कर्मियों, उपकरणों और जांच सुविधाओं की कमी है, वहां प्राथमिकता से सुधार किया जाए। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि मरीजों को उनका पूरा लाभ मिले।
## भविष्य की जरूरतों के अनुसार बनेगी स्वास्थ्य अधोसंरचना की योजना
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बढ़ती आबादी और भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके लिए प्रत्येक जिले में मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं, जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जाएगा। अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार करने और नवगठित जिलों में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य अधोसंरचना का विकास केवल अस्पताल भवन बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी, चिकित्सा उपकरण, दवाइयां और जांच सुविधाएं उपलब्ध होना भी जरूरी है।
## जिला अस्पताल से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक मिलेंगी जरूरी सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सामान्य जांच और उपचार के लिए मरीजों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और मरम्मत की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मरम्मत या रखरखाव के अभाव में कोई महत्वपूर्ण उपकरण लंबे समय तक बंद नहीं रहना चाहिए।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के मानव संसाधन, रिक्त पदों पर भर्ती और वित्तीय प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि रिक्त पदों पर भर्ती के प्रयास किए जा रहे हैं तथा सेवा भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए।
अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के साथ ई-हॉस्पिटल और आभा जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की गई।
## मातृ-शिशु स्वास्थ्य और सुरक्षित प्रसव पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण, चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें तथा प्रसूता महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।
उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा। बैठक में संस्थागत प्रसव, पूर्ण टीकाकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियों में टीकाकरण, मलेरिया की रोकथाम, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि बीमारियों की समय पर पहचान हो और मरीजों को शुरुआती स्तर पर ही उपचार मिल सके।
## दुर्गम इलाकों में एंबुलेंस नहीं पहुंची तो बनेगी वैकल्पिक व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 102 महतारी एक्सप्रेस की सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि आपात स्थिति में मरीज तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचना बेहद जरूरी है। जिन क्षेत्रों में सड़क या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एंबुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए।
इस व्यवस्था के तहत मरीजों को गांव से एंबुलेंस प्वाइंट या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक समाधान तैयार करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के तहत 375 एंबुलेंस और 102 महतारी एक्सप्रेस के तहत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक महतारी एक्सप्रेस सेवा से 2 लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं।
## अस्पताल में मृत्यु होने पर परिजनों को समय पर मिले शव वाहन
मुख्यमंत्री ने शव वाहन सेवाओं को मजबूत बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। अस्पताल में किसी मरीज की मृत्यु होने पर परिजनों को शव वाहन के लिए परेशान न होना पड़े। उन्होंने ऐसी व्यवस्था विकसित करने को कहा, जिससे शव वाहन की सुविधा सहजता और समय पर उपलब्ध हो तथा परिवार की गरिमा का सम्मान बना रहे।
## सिकल सेल और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर भी ध्यान
बैठक में सिकल सेल रोग की रोकथाम, जांच और उपचार कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग, परामर्श और उपचार सुविधाओं का विस्तार करने के निर्देश दिए। उन्होंने सिकल सेल रोग के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा विवाह पूर्व स्वैच्छिक जांच और आनुवंशिक परामर्श के बारे में लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया। अधिकारियों को वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और परामर्श एवं उपचार सुविधाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाने पर जोर दिया, ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता मिल सके।
बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मोबाइल हेल्थ सेवाओं और मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत एक लाख लोगों को उपचार का लाभ मिला है। मुख्यमंत्री ने पात्र मरीजों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।
## छत्तीसगढ़ में छह नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी
चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और छह निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अतिरिक्त छह नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की प्रगति, नए संस्थानों की स्थापना और मौजूदा कॉलेजों में फैकल्टी तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल चिकित्सा शिक्षा के संस्थान नहीं हैं, बल्कि संबंधित क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र भी हैं। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ ओपीडी, आईपीडी और जांच सुविधाओं को भी मजबूत किया जाना चाहिए। चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ पर्याप्त फैकल्टी, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
## नर्सिंग और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या बढ़ी
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या आठ से बढ़कर 17 हो गई है। वहीं, फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर सात हो गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार एलाइड हेल्थ से जुड़े 11 पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इनके अंतर्गत 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में पहली बार डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें शुरू की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से प्रशिक्षित चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिसका लाभ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा।
## दवाइयों की आपूर्ति और उपकरणों की मरम्मत पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए दवाइयों की खरीदी, आपूर्ति, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में आवश्यक दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी न हो। दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों के प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
संचालनालय आयुष और राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित संस्थाओं, मानव संसाधन, उपचार सुविधाओं और योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने आयुष चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के निर्देश दिए।
## त्योहारी सीजन में मिठाई और दूध की होगी सघन जांच
आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान मिठाई, दुग्ध उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और बिक्री स्थलों की नियमित जांच की जाए। अमानक या मिलावटी खाद्य पदार्थ मिलने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों को पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ काम करने के निर्देश दिए।
## अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि जरूरत के समय उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितनी सहजता और समयबद्धता से पहुंचता है। उन्होंने जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित समीक्षा करने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कमियों को दूर करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं को अधिक सुलभ, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। शहरों से लेकर सुदूर वनांचलों तक प्रत्येक नागरिक को जरूरत पड़ने पर समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराना सरकार का लक्ष्य है।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, संचालक स्वास्थ्य संजीव कुमार झा, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा रितेश अग्रवाल और मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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साभार: Ekhabri


