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Chhattisgarh High Court News: हाईकोर्ट के आदेश की नौ महीने तक अनदेखी, आबकारी आयुक्त समेत दो अफसरों को अवमानना नोटिस, जानें क्या है मामला

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Chhattisgarh High Court News: हाईकोर्ट के आदेश की नौ महीने तक अनदेखी, आबकारी आयुक्त समेत दो अफसरों को अवमानना नोटिस, जानें क्या है मामला

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41150-chhattisgarh-high-court-news Chhattisgarh High Court News: हाईकोर्ट के आदेश की नौ महीने तक अनदेखी, आबकारी आयुक्त समेत दो अफसरों को अवमानना नोटिस, जानें क्या है मामला

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश का तय समय में पालन नहीं करने पर आबकारी आयुक्त पीएस एल्मा और अतिरिक्त आबकारी आयुक्त पीएल साहू को अवमानना का नोटिस जारी किया गया है।

जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की एकलपीठ ने दोनों अधिकारियों से पूछा है कि उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। जवाब दाखिल करने के लिए अधिकारियों को तीन सप्ताह का समय दिया गया है।

जानें क्या है मामला

मामला जांजगीर-चांपा में आबकारी विभाग में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत मुकेश कुमार शर्मा की पदोन्नति से जुड़ा है। उन्होंने आबकारी उप निरीक्षक पद की विभागीय पदोन्नति परीक्षा में हिस्सा लिया था। चयन प्रक्रिया के दौरान उनकी वर्ष 2017, 2018 और 2019 की सेवा पुस्तिका में दर्ज प्रतिकूल प्रविष्टियों के आधार पर 15 अंक काट दिए गए थे। अंक कम होने के कारण वे पदोन्नति की प्रक्रिया से बाहर हो गए।

सेवा पुस्तिका की प्रतिकूल प्रविष्टियों को हाईकोर्ट ने किया था निरस्त

मुकेश कुमार शर्मा ने इस कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आया कि जिन वर्षों की सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल प्रविष्टियां दर्ज की गई थीं, उनकी जानकारी कर्मचारी को पहले नहीं दी गई थी। साथ ही उसे इन प्रविष्टियों के संबंध में अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं मिला था।

सुनवाई के बाद 16 दिसंबर 2025 को जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ ने मामले पर फैसला सुनाते हुए इन प्रतिकूल प्रविष्टियों को निरस्त कर दिया था। कोर्ट ने विभाग को उपलब्ध अन्य सेवा अभिलेखों के आधार पर मुकेश कुमार शर्मा के पदोन्नति मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था।

90 दिन में नया आदेश जारी करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता के पदोन्नति मामले पर पुनर्विचार कर 90 दिनों के भीतर नया आदेश जारी किया जाए। कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के रुखसाना शाहीन खान मामले में प्रतिपादित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया था।

हालांकि, निर्धारित 90 दिन की अवधि बीतने के बाद भी विभाग की ओर से हाईकोर्ट के निर्देश के अनुरूप कोई निर्णय नहीं लिया गया। आदेश का पालन नहीं होने पर मुकेश कुमार शर्मा ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।

कोर्ट ने मांगा जवाब, तीन सप्ताह की मोहलत

अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि निर्धारित समयसीमा के बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि न्यायालय के आदेश के पालन में इस तरह की देरी से संबंधित व्यक्ति को मिलने वाली राहत में अनावश्यक विलंब होता है और इससे अवमानना से जुड़े मामलों का बोझ भी बढ़ता है।

मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की एकलपीठ ने दोनों अधिकारियों को यह बताने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है कि उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

साभार: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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