ब्रह्मकपाल: जहां शिवजी के हाथ से छूटा था ब्रह्मा का कपाल, वहीं पिंडदान माना जाता है अंतिम
पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए देशभर के अलग-अलग तीर्थस्थलों पर श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है। गयाजी, काशी और हरिद्वार जैसे स्थानों के साथ उत्तराखंड का ब्रह्मकपाल भी पिंडदान के लिए विशेष माना जाता है। बदरीनाथ धाम के पास अलकनंदा नदी के तट पर स्थित इस स्थान को लेकर धार्मिक मान्यता […]
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