पानी की बूंद पड़ते ही महकेगी खस की राखी, छत्तीसगढ़ में अनोखा नवाचार
रायपुर। रक्षाबंधन पर इस बार छत्तीसगढ़ में भाइयों की कलाई पर बंधने वाली राखियां सिर्फ रिश्तों की डोर नहीं होंगी, बल्कि प्रकृति की खुशबू भी बिखेरेंगी। खस की जड़ों से तैयार की जा रही विशेष राखियां पानी की एक बूंद या नमी के संपर्क में आते ही प्राकृतिक और सोंधी खुशबू बिखेरने लगती हैं। पूरी तरह प्राकृतिक, हाथ से निर्मित और बायोडिग्रेडेबल ये राखियां पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ त्वचा के लिए भी सुरक्षित बताई गई हैं।
छत्तीसगढ़ में पारंपरिक औषधीय और सुगंधित पौधों से जुड़े स्थानीय हुनर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खस से इन विशेष राखियों का निर्माण किया जा रहा है। बारिश के मौसम में या हाथ धोते समय जब राखी पर पानी की बूंद पड़ेगी, तो इससे निकलने वाली खुशबू भाई को बहन के स्नेह का अनोखा एहसास कराएगी।
वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से परंपरा और नवाचार का संगम
वन मंत्री केदार कश्यप की मंशा के अनुरूप वन संपदा और पारंपरिक औषधीय पौधों के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इसी पहल के तहत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा खस जैसी सुगंधित वनस्पति के उपयोग से राखियों को नया स्वरूप दिया गया है।
बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम और उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला के मार्गदर्शन में धमतरी जिले की अन्नपूर्णा महिला स्व सहायता समूह, नारी की 10 महिलाओं ने 1000 खस राखियां तैयार की हैं। यह पहल पारंपरिक भावनाओं को आधुनिक सोच से जोड़ने के साथ स्थानीय महिलाओं के हुनर को भी नई पहचान दे रही है।
पानी की बूंद के साथ बिखरेगी प्राकृतिक खुशबू
खस से बनी इन राखियों की सबसे बड़ी खासियत उनकी प्राकृतिक सुगंध है। सामान्य राखियों से अलग ये राखियां नमी के संपर्क में आने पर खुशबू छोड़ती हैं। बारिश के दौरान या हाथ धोते समय पानी की बूंद पड़ने पर राखी से उठने वाली सुगंध रक्षाबंधन के अनुभव को और खास बनाएगी।
वन संपदा से रोजगार और नवाचार की नई राह
खस राखियों का निर्माण केवल रक्षाबंधन को खास बनाने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए वन आधारित उत्पादों को बाजार से जोड़ने, स्थानीय संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक उत्पादों में बदलने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। ऐसे उत्पाद स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा करने में भी मददगार हो सकते हैं।
राखी में रिश्तों की मिठास के साथ छत्तीसगढ़ की खुशबू
वन मंत्री केदार कश्यप ने इस नवाचार को भाई-बहन के रिश्ते और प्रकृति के जुड़ाव का सुंदर उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस रक्षाबंधन बहनों का प्यार भाइयों की कलाई पर बंधेगा और खस की राखी अपनी खुशबू से उस रिश्ते को एक अलग एहसास देगी। पानी की बूंद के साथ जब राखी महकेगी, तो उसमें बहन के स्नेह के साथ छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा की खुशबू भी महसूस होगी।
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Source: Ekhabri


