बस्तर में बदली तस्वीर, सुरक्षा कैंप बने सेवा डेरा, गांवों तक पहुंच रहीं सरकारी योजनाएं
रायपुर। कभी नक्सल हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहने वाले बस्तर के गांवों में अब विकास और जनविश्वास की नई कहानी लिखी जा रही है। जिन क्षेत्रों में कभी भय का माहौल था, वहां अब सुरक्षा कैंप जनसेवा और विकास के केंद्र बन रहे हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थापित लगभग 200 सुरक्षा कैंपों को शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम चल रहा है। इसके पहले चरण में 70 कैंपों को सेवा डेरा बनाया जा रहा है। इस पहल से दूरस्थ ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास तेज हुए हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प से बस्तर नक्सलवाद के प्रभावों से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य बस्तर को देश के अग्रणी विकसित जनजातीय क्षेत्रों में शामिल करना है। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से दूरस्थ अंचलों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। वहीं, कृषि, पशुपालन और सिंचाई से जुड़ी योजनाओं के जरिए ग्रामीणों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
# शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा बना सुशासन और जनविश्वास का प्रतीक
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 18 मई 2026 को बस्तर जिले के नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर में देश के पहले शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया था। अब इस पहल का विस्तार किया जा रहा है। नेतानार बस्तर के महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर की जन्मस्थली है। वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह में गुंडाधुर ने आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और जल, जंगल एवं जमीन के अधिकारों के लिए अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया था। उनकी ऐतिहासिक धरती पर स्थापित सेवा डेरा आज आदिवासी समाज को स्वावलंबन और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।
# एक ही छत के नीचे मिल रहीं सरकारी और डिजिटल सुविधाएं
पहले बस्तर के ग्रामीणों को आधार कार्ड बनवाने, बैंक खाता खुलवाने और जाति, निवास या आय प्रमाण पत्र प्राप्त करने जैसे छोटे-छोटे कामों के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। अब सेवा डेरा के माध्यम से इन सुविधाओं को गांवों के नजदीक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। यहां आधार कार्ड बनवाने और अपडेट कराने, केवाईसी, मोबाइल नंबर लिंक करने तथा जन्म, मृत्यु, आय और जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर मिल रहा है। इससे ग्रामीणों का समय और आने-जाने का खर्च बचाने में मदद मिल रही है।
# बैंक सखी के माध्यम से गांवों तक पहुंच रहीं बैंकिंग सेवाएं
सेवा डेरा में महिलाओं को बैंक सखी के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीणों को गांव में ही पैसे निकालने, जमा करने और बैंक खातों से जुड़ी सुविधाएं प्राप्त करने में मदद मिल रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य परामर्श, आंगनबाड़ी सेवाओं और प्राथमिक शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी सुलभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को जरूरी सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिल रही है।
# महिला स्व-सहायता समूहों से बढ़ रहे रोजगार के अवसर
शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को आजीविका से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नेतानार में गुंडाधुर महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं इमली का प्रसंस्करण कर उच्च गुणवत्ता वाला इमली पल्प तैयार कर रही हैं। समूह की सदस्य लंबी नाग के अनुसार, इस काम से जुड़कर महिलाएं सालाना एक लाख रुपये तक की आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

सेवा डेरा से मिलने वाली सुविधाओं ने ग्रामीण महिलाओं की रोजमर्रा की परेशानियां भी कम की हैं। उदाहरण के तौर पर, सुखदेवी जैसी महिलाओं को अपनी छोटी बच्ची का आधार कार्ड बनवाने के लिए अब दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इस तरह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सेवाएं समय की बचत के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए सुविधाजनक साबित हो रही हैं।
महिलाएं पारंपरिक ढेंकी से चावल तैयार कर उसकी बिक्री के जरिए अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर रही हैं। धान की भूसी का उपयोग पशु आहार के रूप में किया जा रहा है। वहीं, सिलाई प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। इन गतिविधियों से पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
# बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग से राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे बस्तर के उत्पाद
बस्तर के स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए उनकी पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हाल ही में अहमदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की टीम ने नेतानार पहुंचकर सिलाई, इमली प्रसंस्करण और पारंपरिक ढेंकी से चावल तैयार करने जैसे कार्यों का जायजा लिया। टीम ने स्थानीय उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग की संभावनाओं पर चर्चा की। इस पहल से बस्तर की ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के नए अवसर मिल सकते हैं।
शहीद वीर गुंडाधुर की धरती पर सुरक्षा कैंपों को सेवा डेरा में बदलने की पहल बस्तर में बदलते सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को दर्शाती है। सरकारी योजनाओं को ग्रामीणों के करीब लाने, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों से विकास को नई दिशा मिल रही है। यह पहल केवल बुनियादी सुविधाओं के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर के दूरस्थ गांवों में आत्मनिर्भरता, जनविश्वास और बेहतर भविष्य की उम्मीद मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
विशेष लेख: धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायपुर
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साभार: Ekhabri


