न दिन देखा, न रात… जब भी उठी रक्त की पुकार, खाकी वर्दी वाले ने ऐसे निभाया मसीहा का फर्ज
संजीव, सोनीपत। न दिन देखते हैं, न रात देखते हैं, रक्तदान करने वाले रक्त की बाट देखते हैं।’ मानवता की
साभार: Lalluram
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