होम › Technology › दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: 47 मेट्रो स्टेशनों का नक्शा मांगा, बैरिकेडिंग और इंटरनेट पर भी सुनवाई, मंगलवार तक मांगा जवाब
Technology

दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: 47 मेट्रो स्टेशनों का नक्शा मांगा, बैरिकेडिंग और इंटरनेट पर भी सुनवाई, मंगलवार तक मांगा जवाब

WhatsApp Facebook
दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: 47 मेट्रो स्टेशनों का नक्शा मांगा, बैरिकेडिंग और इंटरनेट पर भी सुनवाई, मंगलवार तक मांगा जवाब

For latest updates, join our official groups:

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

39519-sc दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: 47 मेट्रो स्टेशनों का नक्शा मांगा, बैरिकेडिंग और इंटरनेट पर भी सुनवाई, मंगलवार तक मांगा जवाब

नई दिल्ली: दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की हिरासत, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और इंटरनेट सेवाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने अधिकारियों से बंद किए गए मेट्रो स्टेशनों का नक्शा मांगा। कोर्ट ने मेट्रो सेवाएं सामान्य समय-सारणी के अनुसार चलाने का निर्देश भी दिया।

57 से घटकर 47 हुए बंद मेट्रो स्टेशन

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पहले 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में यह संख्या घटकर 47 रह गई। पीठ ने अधिकारियों से इन स्टेशनों की भौगोलिक स्थिति बताने वाला नक्शा पेश करने को कहा। अधिकारियों ने बताया कि पिछली रात 10 बजे तक सभी स्टेशन खोल दिए गए थे।

इंटरनेट सेवा बहाल होने की जानकारी

प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध का मुद्दा भी उठा। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इंटरनेट बंद करने की कार्रवाई पर सवाल उठाए और अनुराधा भसीन मामले का हवाला दिया। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि इंटरनेट सेवाएं पिछली रात से बहाल हैं। अदालत ने इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लेने की बात कही।

पूरी दिल्ली से बैरिकेड हटाने की मांग

सुनवाई के दौरान वकीलों ने दिल्ली में बैरिकेडिंग हटाने और आम लोगों की आवाजाही सामान्य करने की मांग की। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट तक पहुंचने में भी बाधाएं आ रही हैं। अदालत ने अधिकारियों से प्रतिबंधों और सार्वजनिक परिवहन पर उनके असर से जुड़ी जानकारी मांगी।

पुलिस कार्रवाई और हिरासत पर उठे सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता शहदान फरासत ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को घसीटकर बसों में बैठाया गया और कुछ लोगों को बसों से बाहर फेंका गया। वहीं, एन. हरिहरन ने नागरिकों की स्वतंत्र आवाजाही पर पाबंदियों को लेकर चिंता जताई। ये आरोप सुनवाई के दौरान वकीलों की ओर से रखे गए।

मंगलवार तक जवाब दाखिल करने का निर्देश

कपिल सिब्बल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों और लोगों को हिरासत में लेने का मुद्दा उठाया। सुनवाई के दौरान अदालत के प्रति विश्वास खोने संबंधी टिप्पणी पर सॉलिसिटर जनरल ने आपत्ति जताई। पीठ ने कहा कि वह वकीलों को ऐसी टिप्पणी करने से रोकने का आदेश नहीं दे सकती। कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं पर जवाब और आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट मंगलवार तक दाखिल करने को कहा।

साभार: Asian News Bharat

Asian News Bharat
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
मूल लेख पढ़ें ↗
दोस्तों के साथ साझा करें
📰 सम्बन्धित समाचार

यह भी पढ़ें (सम्बंधित ख़बरे)