ज्ञानेश कुमार पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, बोले- PM मोदी चुनाव ‘चुराने’ के लिए करते हैं इस्तेमाल

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों का चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध बुधवार को और तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ज्ञानेश कुमार की कानूनी सुरक्षा पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा- “Q. Why is CEC Gyanesh Kumar the only Indian with lifelong blanket legal immunity? A. Because PM Modi uses him to steal elections.” यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है।
Q. Why is CEC Gyanesh Kumar the only Indian with lifelong blanket legal immunity?
A. Because PM Modi uses him to steal elections.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 30, 2026
2023 के कानून की धारा 16 क्या कहती है?
ज्ञानेश कुमार को मिली कानूनी सुरक्षा को लेकर विवाद 2023 के कानून की धारा 16 से जुड़ा है। इसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान किए गए कार्यों से संबंधित कुछ सिविल या आपराधिक कार्यवाहियों पर अदालतों में रोक का प्रावधान है। हालांकि, राहुल गांधी का इसे “आजीवन व्यापक कानूनी छूट” बताना उनका राजनीतिक वर्णन है, कानून की भाषा नहीं।
खरगे ने भी मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस ने SIR को रोकने और मतदाता सूची में कथित तौर पर हटाए गए 13.3 करोड़ नामों को बहाल करने की मांग रखी है। पार्टी ने मतदाता सूची में बदलाव से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक करने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग भी की है।
SIR को लेकर विपक्ष की बड़ी आपत्ति
विपक्ष का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे वैध मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाता को सूचना, कारण बताने और अपील का प्रभावी मौका दिया जाए। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि उसके भीतर अलग-अलग राय और आपत्तियां संस्थागत चर्चा का हिस्सा हैं और उसके फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
चुनाव आयोग पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
SIR और मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच दो चुनाव आयुक्तों की ओर से पिछले 10 महीनों में कई आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है। अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां CEC की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई होनी है।
Source: Nishaanebaz


