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कई कोशिशों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान, जेसीबी और हाइड्रोलिक मशीन भी फेल, अब IIT इंदौर करेगी वैज्ञानिक जांच

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कई कोशिशों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान, जेसीबी और हाइड्रोलिक मशीन भी फेल, अब IIT इंदौर करेगी वैज्ञानिक जांच

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38370-hanuman कई कोशिशों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान, जेसीबी और हाइड्रोलिक मशीन भी फेल, अब IIT इंदौर करेगी वैज्ञानिक जांच

उज्जैन: उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क को करीब 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। इसी दायरे में सती गेट स्थित खड़े हनुमान मंदिर आ रहा था। नगर निगम ने 4-5 सितंबर को मंदिर का ढांचा तोड़ दिया, लेकिन प्रतिमा को हटाने की कोशिश सफल नहीं हुई।

चार बार कोशिश, 8 फीट की प्रतिमा नहीं हिली

प्रशासन ने जेसीबी, क्रेन और हाइड्रोलिक मशीन की मदद से करीब 8 फीट ऊंची प्रतिमा को हटाने की कोशिश की। चार दिनों में कई प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। भक्तों ने इसे भगवान का संकेत और चमत्कार बताया। उन्होंने प्रतिमा को नुकसान पहुंचने की आशंका जताते हुए विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की।

38371-hanumanjpg-1 कई कोशिशों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान, जेसीबी और हाइड्रोलिक मशीन भी फेल, अब IIT इंदौर करेगी वैज्ञानिक जांच

अब IIT इंदौर की टीम करेगी जांच

लगातार असफल प्रयासों के बाद प्रशासन ने IIT इंदौर के विशेषज्ञों को बुलाया। टीम ने मंगलवार को करीब दो घंटे तक विशेष उपकरणों से जांच की। जमीन की स्कैनिंग कर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रतिमा कितनी गहराई तक है और उसके नीचे या आसपास किस तरह की संरचना मौजूद है। रिपोर्ट आने के बाद ही प्रतिमा को हटाने का तरीका तय होगा।

1000 साल पुरानी होने का दावा

विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार प्रतिमा करीब 1000 साल पुरानी हो सकती है। यह मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर से बनी बताई जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक परमार वंश और राजा भोज के समय इस तरह के पत्थरों पर प्रतिमाएं बनाने की परंपरा थी। हालांकि प्रतिमा की सही उम्र की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

भक्तों के लिए ‘डॉक्टर हनुमान’

स्थानीय भक्त खड़े हनुमान को ‘डॉक्टर हनुमान’ और मंदिर को ‘उज्जैन का एम्स’ कहते हैं। मान्यता है कि यहां बीमार बच्चों और अन्य परेशानियों से जूझ रहे लोग मन्नत मांगते हैं। मंदिर के पुजारी महेश बैरागी के मुताबिक वर्षों से यहां बच्चों को झाड़नी दी जाती है और ताबीज बांधे जाते हैं। प्रतिमा नहीं हिलने के बाद भक्त बड़ी संख्या में पूजा-पाठ और हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं।

प्रतिमा के ऊपर लगाया गया टेंट

मंदिर का ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने उसके ऊपर कैनोपी टेंट लगाया है। पुजारी का कहना है कि प्रशासन से विरोध नहीं है, लेकिन प्रतिमा को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए। विशेषज्ञ जिस तरीके को सुरक्षित बताएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Source: Nishaanebaz

Nishaanebaz
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Nishaanebaz
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