होम Technology अधिराज ग्रुप के डायरेक्टर ने बहन-जीजा से 1.25 करोड़ ठगे, डबल प्रॉफिट का झांसा देकर इन्वेस्ट कराया, पैसे मांगे तो फर्जी साइन कर फर्म से बाहर किया, तेलीबांधा पुलिस ने शुरु की जांच
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अधिराज ग्रुप के डायरेक्टर ने बहन-जीजा से 1.25 करोड़ ठगे, डबल प्रॉफिट का झांसा देकर इन्वेस्ट कराया, पैसे मांगे तो फर्जी साइन कर फर्म से बाहर किया, तेलीबांधा पुलिस ने शुरु की जांच

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अधिराज ग्रुप के डायरेक्टर ने बहन-जीजा से 1.25 करोड़ ठगे, डबल प्रॉफिट का झांसा देकर इन्वेस्ट कराया, पैसे मांगे तो फर्जी साइन कर फर्म से बाहर किया, तेलीबांधा पुलिस ने शुरु की जांच

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34959-adhiraj-group-fraud-case-adhiraj-cement-adhiraj-tradelink-shubham-singhal अधिराज ग्रुप के डायरेक्टर ने बहन-जीजा से 1.25 करोड़ ठगे, डबल प्रॉफिट का झांसा देकर इन्वेस्ट कराया, पैसे मांगे तो फर्जी साइन कर फर्म से बाहर किया, तेलीबांधा पुलिस ने शुरु की जांच

adhiraj-group-fraud-case: रायपुर। कारोबार में साझेदारी और दोगुना मुनाफा दिलाने का झांसा देकर बहन और जीजा से 1.25 करोड़ रुपए की ठगी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि निवेश की रकम वापस मांगने पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें साझेदारी फर्म से बाहर कर दिया गया। मामले का खुलासा रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स से RTI के जरिए मिले दस्तावेजों के बाद हुआ।

कारोबार बढ़ाने के नाम पर कराया निवेश

तेलीबांधा थाना पुलिस के अनुसार, मनोवैज्ञानिक काउंसलर नागपुर के लॉ कॉलेज स्क्वायर निवासी शिवांगी गर्ग (43) ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनके भाई शुभम सिंघल और भाभी जया सिंघल रायपुर में अधिराज सीमेंट और बाद में अधिराज ट्रेडलिंक नाम से साझेदारी फर्म संचालित करते थे।

शिवांगी का आरोप है कि वर्ष 2020 में कारोबार के विस्तार और ज्यादा मुनाफे का भरोसा दिलाकर उनसे और उनके पति से अलग-अलग समय पर करीब 1.25 करोड़ रुपए निवेश कराए गए। यह राशि नकद और बैंक माध्यम से दी गई थी।

शुरुआत में भेजा मुनाफा, फिर बंद किया भुगतान

शिकायत के मुताबिक, निवेश के बाद शुरुआत में विश्वास बनाए रखने के लिए मुनाफे के नाम पर कुछ राशि उनके बैंक खाते में भेजी जाती रही। इससे उन्हें कारोबार में फायदा होने का भरोसा बना रहा।

लेकिन बाद में जब उन्होंने अपनी निवेश की गई रकम वापस मांगी तो स्थिति बदल गई। आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय उन्हें साझेदारी में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

रकम मांगने पर बनाया पार्टनर, फिर हटाया

पीड़िता के अनुसार, 4 अप्रैल 2025 को उन्हें और उनके पति को दोनों फर्मों में भागीदार बनाया गया। इसी दिन शुभम सिंघल ने खुद साझेदारी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मुनाफे की राशि मिलनी बंद हो गई। जनवरी 2026 में रायपुर में हुई पारिवारिक बैठक में रकम लौटाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया।

RTI से सामने आया फर्जीवाड़ा

शिवांगी गर्ग ने मामले की जानकारी जुटाने के लिए रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स से सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज मांगे। दस्तावेजों की जांच में कथित रूप से सामने आया कि 6 मार्च और 6 अप्रैल 2026 की पार्टनरशिप डीड में उनके फर्जी हस्ताक्षर कर उन्हें दोनों फर्मों से रिटायर्ड दिखा दिया गया।

शिकायतकर्ता का कहना है कि जिन तारीखों के दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर बताए गए हैं, उन दिनों वह रायपुर में मौजूद ही नहीं थीं। फिलहाल​ शिकायत के अनुसार तेलीबांधा थाना पुलिस ने धोखाधड़ी, कूटरचना और जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Source: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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