व्हाट्सएप में नया अपडेट: अब AI टूल से चैट्स तक पहुंचने का विकल्प, कंपनी ने दी सफाई
व्हाट्सएप दुनिया का सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है। इसके करोड़ों यूजर्स हैं, जो अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें इसी पर साझा करते हैं। हाल ही में कंपनी ने अपने अपडेट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ा नया फीचर जोड़ा है। इस फीचर के सामने आते ही यूजर्स के मन में प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गईं।
पे-टीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि अब व्हाट्सएप का AI ग्रुप चैट्स को पढ़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई इस फीचर को ब्लॉक करना चाहता है, तो उसे सेटिंग्स में जाकर बदलाव करना होगा। उनका यह बयान तेजी से वायरल हुआ और लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि क्या अब उनकी निजी बातचीत सुरक्षित नहीं है?
दरअसल, व्हाट्सएप ने हाल ही में अपने नए अपडेट में कई फीचर्स पेश किए थे। इन फीचर्स में एक ऐसा विकल्प भी है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल को चैट तक पहुंचने की अनुमति देता है। लेकिन कंपनी ने साफ कर दिया है कि यह फीचर पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) है। इसका इस्तेमाल तभी होगा, जब कोई यूजर खुद इस सुविधा को एक्टिव करना चाहे। यदि कोई यूजर AI फीचर को एक्टिवेट नहीं करता है, तो उसकी चैट AI तक नहीं पहुँच पाएगी।
व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि मेटा AI केवल उन्हीं चैट्स को पढ़ सकता है जिन्हें यूजर खुद चुनकर साझा करता है। यानी यह फीचर किसी भी तरह से बैकग्राउंड में यूजर की चैट्स को स्कैन नहीं करता। कंपनी ने बार-बार दोहराया कि उनकी सभी पर्सनल चैट्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहती हैं। इस तकनीक का सीधा मतलब है कि चैट्स को केवल वही लोग पढ़ सकते हैं, जो संदेश भेजते और प्राप्त करते हैं।
कंपनी का कहना है कि यह AI फीचर केवल उन लोगों के लिए है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अपने चैटिंग अनुभव को आसान बनाना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, कोई यूजर चाहे तो AI से किसी चैट का सारांश निकाल सकता है, किसी प्रश्न का जवाब तुरंत पा सकता है या फिर ग्रुप चैट में महत्वपूर्ण जानकारियाँ जल्दी छाँट सकता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति यह सुविधा नहीं चाहता, तो उसे कोई मजबूरी नहीं है।
इस विवाद से यह साफ होता है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में प्राइवेसी सबसे संवेदनशील मुद्दा है। यूजर्स की हर छोटी-बड़ी जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होती है, इसलिए कंपनियों को बार-बार यह भरोसा दिलाना पड़ता है कि उनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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