UP News : सड़क हादसों में जान बचाएगा UPTEN नेटवर्क, 1200 एडवांस एंबुलेंस बनेंगी चलते-फिरते अस्पताल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार एक बड़ी स्वास्थ्य पहल शुरू करने जा रही है। इसके तहत उत्तर प्रदेश ट्रॉमा एंड इमरजेंसी नेटवर्क (UPTEN) तैयार किया जाएगा, जिसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद शुरुआती गोल्डन ऑवर में मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है।
इस नेटवर्क के जरिए प्रदेश की ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक, स्ट्रोक और अन्य आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को एक डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि समय पर इलाज मिलने से सड़क हादसों में होने वाली मौतों और गंभीर जटिलताओं को कम किया जा सके।
173 ट्रॉमा और इमरजेंसी यूनिट का होगा विकास
UPTEN योजना के तहत प्रदेश में 173 इंटीग्रेटेड ट्रॉमा एंड इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट विकसित करने की तैयारी है। इनमें 11 लेवल-1 एपेक्स हब, 36 लेवल-2 रीजनल सेंटर और 126 लेवल-3 जिला स्तरीय इकाइयां शामिल होंगी। इसका उद्देश्य मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार सबसे नजदीकी और सक्षम अस्पताल तक तेजी से पहुंचाना है।
हर साल 10 से 12 हजार लोगों की जान बचाने का लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए हर साल करीब 10 हजार से 12 हजार लोगों की जान बचाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में सही इलाज मिलने से मौतों के साथ-साथ स्थायी विकलांगता के मामलों में भी कमी लाई जा सकती है।
1200 हाईटेक एंबुलेंस बनेंगी मिनी अस्पताल
UPTEN नेटवर्क के तहत करीब 1200 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस को जोड़ा जाएगा। इन एंबुलेंस को केवल मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का साधन नहीं, बल्कि चलते-फिरते आपातकालीन उपचार केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें जरूरी चिकित्सा उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था होगी, जिससे मरीज को अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्राथमिक उपचार मिल सके।
कमांड सेंटर संभालेगा पूरा नेटवर्क
योजना के संचालन के लिए प्रदेश के 18 मंडलीय स्तर के कमांड सेंटर विकसित किए जाएंगे। ये सेंटर इमरजेंसी कॉल, एंबुलेंस की उपलब्धता, अस्पतालों में बेड और विशेषज्ञ डॉक्टरों के बीच तालमेल स्थापित करेंगे। रियल टाइम नेटवर्किंग, डिजिटल अलर्ट सिस्टम और एआई आधारित ट्रायेज जैसी तकनीकों की मदद से मरीज को सही समय पर सही अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
रिस्पांस टाइम में 30 से 50 फीसदी कमी का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद आपातकालीन सेवाओं के रिस्पांस टाइम में 30 से 50 प्रतिशत तक कमी लाई जाए। योजना के तहत ‘राइट मरीज, राइट डिपार्टमेंट और राइट टाइम’ के सिद्धांत पर काम किया जाएगा, ताकि गंभीर मरीजों को बिना देरी के विशेषज्ञ इलाज मिल सके।
आम नागरिक भी बनेंगे फर्स्ट रिस्पॉन्डर
UPTEN योजना में आम लोगों को भी आपातकालीन व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए तीन स्तरों पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क बनाया जाएगा। पहले स्तर पर पुलिस, एंबुलेंस चालक, फायर सर्विस और हाईवे पेट्रोल जैसी सेवाएं रहेंगी। दूसरे स्तर पर पुलिस, होमगार्ड और अन्य संस्थागत कर्मचारी होंगे, जबकि तीसरे स्तर पर आम नागरिकों को बेसिक इमरजेंसी रिस्पांस की ट्रेनिंग दी जाएगी।
48 घंटे तक मिलेगा मुफ्त इमरजेंसी इलाज
योजना की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि गंभीर आपात स्थिति में मरीजों को शुरुआती 48 घंटे तक मुफ्त इमरजेंसी इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य आर्थिक परेशानी के कारण इलाज में होने वाली देरी को रोकना है। इसके साथ ही इमरजेंसी मेडिसिन ऑफिसर कैडर, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और बेहतर मानव संसाधन नीति पर भी काम किया जाएगा।
UPTEN नेटवर्क के जरिए उत्तर प्रदेश में इमरजेंसी हेल्थ सिस्टम को आधुनिक, तेज और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी है, जिससे दुर्घटना और गंभीर बीमारी के समय मरीजों को समय पर जीवनरक्षक उपचार मिल सके।
Source: Nishaanebaz


