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UP News : निजी स्कूलों के शिक्षकों को मिलेगा कैशलेस इलाज का लाभ, सरकारी स्कूलों के 10 लाख बच्चों को मिलेंगे 1,200 रूपये

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UP News : निजी स्कूलों के शिक्षकों को मिलेगा कैशलेस इलाज का लाभ, सरकारी स्कूलों के 10 लाख बच्चों को मिलेंगे 1,200 रूपये

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33861-yogi-4 UP News : निजी स्कूलों के शिक्षकों को मिलेगा कैशलेस इलाज का लाभ, सरकारी स्कूलों के 10 लाख बच्चों को मिलेंगे 1,200 रूपये

UP Teacher Cashless Treatment Scheme: लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार शिक्षा क्षेत्र से जुड़े शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए कई अहम कदम उठा रही है। सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के बाद अब प्रदेश के निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ देने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत करीब 35 हजार निजी स्कूलों के लगभग 3 लाख शिक्षक और उनके आश्रित लाभान्वित हो सकते हैं। वहीं, सरकारी परिषदीय स्कूलों के करीब 10 लाख विद्यार्थियों को ड्रेस, जूते-मोजे आदि खरीदने के लिए ₹1,200-₹1,200 की राशि डीबीटी के जरिए देने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

निजी स्कूलों के शिक्षकों को मिलेगा कैशलेस इलाज

योगी सरकार की योजना के तहत निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को भी शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के दायरे में लाया जा रहा है। इससे शिक्षकों और उनके आश्रितों को गंभीर बीमारी या उपचार की स्थिति में बड़ी राहत मिल सकती है। योजना के तहत एक शिक्षक परिवार को सालाना ₹5 लाख तक के मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है।

शिक्षकों का मांगा गया पूरा डाटा

योजना को लागू करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों के शिक्षकों का डाटा जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को संबंधित शिक्षकों की जानकारी जुटाकर सत्यापित करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षकों को अपना और अपने आश्रितों का विवरण आधार कार्ड में दर्ज जानकारी के अनुसार उपलब्ध कराना होगा।

कई स्तरों पर होगा आवेदन का सत्यापन

कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल होने के लिए शिक्षकों के आवेदनों की जांच कई स्तरों पर की जाएगी। सबसे पहले आवेदन स्कूल के प्रधानाध्यापक के पास सत्यापन के लिए जाएगा। प्रधानाध्यापक शिक्षक की नियुक्ति और उसके लगातार कार्यरत होने की स्थिति की जांच करेंगे। इसके बाद आवेदन संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी के पास भेजा जाएगा और अंतिम स्वीकृति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्तर से होगी।

अगर कोई शिक्षक नौकरी छोड़ देता है, तो स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को देनी होगी, ताकि योजना के रिकॉर्ड में आवश्यक बदलाव किया जा सके और शिक्षक को योजना से बाहर किया जा सके।

सरकारी स्कूलों के 10 लाख बच्चों को मिलेंगे ₹1,200

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के सरकारी परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 10 लाख विद्यार्थियों के लिए भी सरकार आर्थिक सहायता देने जा रही है। इन बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से ₹1,200 की राशि भेजी जाएगी। इस रकम का इस्तेमाल स्कूल ड्रेस, जूते और मोजे जैसी जरूरी सामग्री खरीदने के लिए किया जाना है।

अभिभावकों को यूनिफॉर्म खरीदने के लिए किया जाएगा प्रेरित

स्कूलों में बच्चों की यूनिफॉर्म सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक अभिभावकों से भी संपर्क करेंगे। पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग के दौरान बच्चों की ड्रेस और अन्य जरूरी सामग्री की स्थिति की जानकारी ली जाएगी। शिक्षकों को अभिभावकों को डीबीटी से मिली राशि का इस्तेमाल बच्चों के लिए निर्धारित सामग्री खरीदने में करने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।

पहले ही 1.10 करोड़ बच्चों को भेजी जा चुकी है राशि

प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में करीब 1.35 करोड़ विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक, इनमें से करीब 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों में ड्रेस, जूते-मोजे, स्कूल बैग और स्टेशनरी जैसी सामग्री के लिए पहले ही राशि भेजी जा चुकी है।

अब नए नामांकन वाले विद्यार्थियों और उन बच्चों को राशि देने की तैयारी है, जिन्हें किसी कारण से पहले डीबीटी का लाभ नहीं मिल पाया था। करीब 10 लाख विद्यार्थियों का डाटा तैयार किया जा चुका है और उन्हें जल्द राशि ट्रांसफर किए जाने की तैयारी है।

बाकी बच्चों के दस्तावेजों का सत्यापन जारी

विभाग के स्तर पर शेष विद्यार्थियों को भी योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया जारी है। करीब 15 लाख बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों को आधार से लिंक कराने और अन्य जरूरी दस्तावेज पूरे कराने का काम चल रहा है। सत्यापन पूरा होने के बाद इन बच्चों के अभिभावकों को भी डीबीटी के जरिए निर्धारित राशि भेजी जाएगी।

Source: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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