सुप्रीम कोर्ट के केंद्र ल बड़े सलाह : रोमियो-जूलियट क्लॉज लाये बर बोलीन, जानव का होथे
Supreme Court : नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ह लइका मन (किशोर मन) के बीच आपसी रजामंदी ले बने रिश्ता अऊ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के गलत इस्तेमाल ल लेके एक बहुत बड़े बात कहे हे। कोर्ट ह केंद्र सरकार ल सलाह दीस हे कि कानून म ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ जोड़े के विचार करे जाय। एखर असली मकसद वो लइका मन ल बचाना हे, जेमन नासमझी म एक-दूसर के सहमति ले रिश्ता त बना लेथें, फेर कानून के सख्ती के सेती ओखर जिंदगी बरबाद हो जाथे।
Supreme Court : काबर पड़ीस एखर जरूरत?
जस्टिस संजय करोल अऊ जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह के बेंच ह सुनवाई के दौरान कहिन कि पॉक्सो जैसे कड़ा कानून के बड़े पैमाना म गलत इस्तेमाल होवत हे। अक्सर देखाय जाथे कि जब दू झन कम उम्र के लइका मन आपसी रजामंदी ले रिश्ता बनाथें, त घर वाले मन विरोध म आके लड़का के खिलाफ पॉक्सो एक्ट म केस दर्ज करा देथें। चूंकि ये कानून म ‘सहमति’ के कोनो जगह नइ हे, एखर सेती नाबालिग होय के बाद घलो लड़का ल अपराधी मान के जेल भेज दे जाथे।
का आय ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’?
सुप्रीम कोर्ट ह जे ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ के सुझाव दे हे, ओखर मतलब हे कि जउन रिश्ता आपसी रजामंदी ले बने हे, ओला पॉक्सो के कड़ा धारा मन ले बाहर रखे जाय। ये क्लॉज ह कानून ल ये पहचाने म मदद करही कि कौन मामला असल म यौन शोषण (Crime) आय अऊ कौन मामला लइका मन के आपसी रजामंदी के आय।
बदला ले बर नइ होवय कानून के उपयोग
कोर्ट ह कहिस कि ये कानून के दुरुपयोग ल लेके कई बार अदालत म मामला आए हे। एखर सेती ये फैसला के एक कॉपी भारत सरकार के विधि सचिव ल भेजे जाय, ताकि वो मन अइसन सिस्टम बना सकें जेखर ले कानून के गलत इस्तेमाल करके बदला लेवइया मन ऊपर लगाम कसे जा सके। कोर्ट के मानना हे कि असली अपराधी ल सजा मिलना जरूरी हे, फेर नासमझी म होय गलती बर कोनो के भविष्य बरबाद नइ होना चाहिये।