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supreme court on pellet guns: प्रदर्शन में शरारती तत्व आकर हिंसा करें तो कैसे रोका जाए, घायल छात्रों का इलाज कराए सरकार: सुप्रीम कोर्ट

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supreme court on pellet guns: प्रदर्शन में शरारती तत्व आकर हिंसा करें तो कैसे रोका जाए, घायल छात्रों का इलाज कराए सरकार: सुप्रीम कोर्ट

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34126-supreme-court-pellet-guns-student-protests-violence-treatment supreme court on pellet guns: प्रदर्शन में शरारती तत्व आकर हिंसा करें तो कैसे रोका जाए, घायल छात्रों का इलाज कराए सरकार: सुप्रीम कोर्ट

supreme court on pellet guns: नई दिल्ली। दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में पैलेट गन के कथित इस्तेमाल के खिलाफ गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा, जब बहुत गंभीर हालात में लाठीचार्ज और आंसू गैस से हिंसा काबू में न आने पर पुलिस को गोली चलाने की इजाजत होती है।

अदालत ने ये भी कहा कि अगर कोई विरोध-प्रदर्शन शरारती तत्वों के कब्जे में आकर हिंसक हो जाए तो पुलिस को पैलेट गन इस्तेमाल करने से कैसे रोका जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि पैलेट गन से कथित फायरिंग में घायल हुए प्रदर्शनकारियों का उचित इलाज किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से ये भी कहा है कि वो RAF के गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखे, लेकिन साथ ही कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक की मांग करने वाले याचिकाकर्ता और पूर्व IPS अधिकारी यशोवर्धन आजाद से सवाल भी किए। जंतर-मंतर और दूसरी जगहों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये बातें कही।

supreme court on pellet guns: सुनवाई में क्या-क्या हुआ

याचिकाकर्ता की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि इसमें काइनेटिक मैटेलिक प्रोजेक्टाइल (धातु का गोला) होता है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि लेकिन पुलिस के नियम खास हालात में इसके इस्तेमाल की इजाजत देते हैं। जब तक कि आप खुद उन नियमों को चुनौती न दें। ग्रेडेड अप्रोच (चरणबद्ध तरीके) के तहत पैलेट गन का इस्तेमाल भी एक कदम है।

इसपर ग्रोवर ने कहा कि पैलेट रबर, प्लास्टिक और धातु के हो सकते हैं। ये धातु के थे और लोगों के शरीर से निकाले गए थे। जस्टिस बागची ने कहा कि हम किसी खास मामले में छर्रों (पेलेट्स) के इस्तेमाल की जांच करने के खिलाफ नहीं हैं। आपको हमें यह दिखाना होगा कि क्या छर्रों का इस्तेमाल ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स’ (हालात के हिसाब से) के तौर पर किया जा सकता है। जबकि कुछ स्थितियों में गोलियां भी चलाई जाती हैं।

supreme court on pellet guns: CJI बोले- गाइडलाइंस तय हो

CJI ने कहा कि छर्रों के कथित तौर पर बहुत ज़्यादा इस्तेमाल को देखते हुए आपकी मांग यह होनी चाहिए कि कोर्ट इनके इस्तेमाल के लिए कोई प्रोटोकॉल तय करे। ग्रोवर ने कहा कि जी हां, सिर्फ़ धातु के छर्रों के लिए। जस्टिस बागची ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट में एक नियम था कि गोला-बारूद बचाने के लिए गोलियां शरीर के किसी अन्य हिस्से के बजाय छाती पर चलाई जानी चाहिए।

इसपर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह ज़रूर औपनिवेशिक दौर का नियम रहा होगा। जस्टिस बागची ने कहा कि उस नियम को रद्द कर दिया गया था। इसलिए आपको हमें ऐसे नियम दिखाने होंगे जहां छर्रों का इस्तेमाल मनमाने ढंग से किया जा रहा हो।

supreme court on pellet guns: विपक्ष का क्या आरोप है?

कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का आरोप है कि दिल्ली में छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के साथ बर्बरता की गई, उन पर पैलेट गन चलाई गई। जिन लोगों ने पैलेट गन चलाई, वे गृह मंत्री अमित शाह के अधीन काम करते हैं। विपक्ष के नेता के तौर पर जनहित के मुद्दों को उठाना मेरा अधिकार है। मेरे लिए आज सबसे अहम मुद्दा छात्रों के साथ होने वाली बर्बरता है। उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश दिया जाए। छात्रों के साथ जो हुआ, उसकी नैतिक ज़िम्मेदारी लेने की शालीनता दिखाएं।

Source: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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