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Supreme Court Lok Adalat Award : लोक अदालत के फैसला म अब छेड़छाड़ नइ, सुप्रीम कोर्ट के बड़े फरमान….

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 Supreme Court Lok Adalat Award : दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ह लोक अदालत ले आए फैसला (जेला ‘अवार्ड’ कहिथें) के उपर एक ठन बहुत बड़े अउ जरूरी फैसला दे हे। कोर्ट ह साफ-साफ कह दे हे के, अगर लोक अदालत कोनो फैसला दे दे हे, त आप मन ओ फैसला ल लागू करे वाला छोटका अदालत (निष्पादन न्यायालय) म जाके चुनौती नइ दे सकव।

 Supreme Court Lok Adalat Award : लागू करे वाला अदालत ह नइ बदल सकय
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ अउ जस्टिस संदीप मेहता के बेंच ह कहीस के, लोक अदालत के अवार्ड ह एक बेर आ गे त कानून के नजर म ओ ह आखिरी (Final) माने जाथे।

कोर्ट ह ए बात साफ करिस के, जऊन अदालत ह लोक अदालत के फैसला ल लागू करत हे, ओकर काम सिरिफ फैसला ल माने अउ लागू करे तक सीमित हे। ओ अदालत ह न त ए देख सकय के फैसला सही हे के गलत, अउ न ही ओला रद्द कर सकय।

चुनौती देहे के एके रद्दा
सुप्रीम कोर्ट ह बताइस के, अगर आप ल लोक अदालत के फैसला ले कोनो शिकायत हे, त चुनौती देहे बर आप मन के पास सिरिफ एके रद्दा हे:

आप मन ल सीधा हाई कोर्ट जाए बर परही। ए चुनौती ह संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत करे जाही।

सुप्रीम कोर्ट ह ए फैसला म एक ठन पुराना आदेश ल खारिज घलो करिस अउ कहिस के, हाई कोर्ट ल अइसन याचिका मन ल खारिज नइ करना चाही, काबर कि लोक अदालत के फैसला ल चुनौती देहे बर जनता के पास कोनो अउ साधारण कानूनी तरीका नइ हे।

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