स्मार्ट मीटर ले बिजली बिल बढ़े के शिकायत, आम उपभोक्ता मन मं बढ़त चिंता
Smart Meter Chhattisgarh : रायपुर। छत्तीसगढ़ मं स्मार्ट मीटर के इस्तेमाल लगातार बढ़त जावत हे। ए बीच कई बिजली उपभोक्ता मन भारी-भरकम बिल आवत के शिकायत करत हें। स्मार्ट मीटर ला लेके बिजली विभाग, जानकार अउ उपभोक्ता मन के बीच अब बहस घलो तेज होगे हवय। नईदुनिया विमर्श कार्यक्रम मं स्मार्ट मीटर के काम करे के तरीका, बिजली बिल अउ उपभोक्ता मन के अधिकार ला लेके कई बात सामने आइस।
बताय जावत हे कि सरकारी विभाग मन के करोड़ों रुपिया के बकाया बिजली बिल वसूल करे बर आरडीएस योजना के तहत प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाए गे रहिस। अब ए योजना के दायरा बढ़ाके आम घरेलू उपभोक्ता मन तक पहुंचाए जावत हे।
स्मार्ट मीटर अउ पुराना मीटर मं का अंतर
विद्युत आफिसर्स एसोसिएशन के संरक्षक, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता अउ विद्युत नियामक आयोग के पूर्व सचिव पीएन सिंह के मुताबिक, सामान्य इलेक्ट्रॉनिक मीटर अउ स्मार्ट मीटर के काम करे के तरीका मं काफी अंतर हे।
पुराना मीटर मुख्य रूप ले सक्रिय बिजली खपत ला दर्ज करय, जबकि स्मार्ट मीटर सक्रिय के संग असक्रिय पावर से जुड़ी खपत ला घलो रिकॉर्ड करे के क्षमता रखथे। एही वजह ले स्मार्ट मीटर के रीडिंग अउ बिलिंग व्यवस्था ला लेके सवाल उठत हवय।
बंद घर मं घलो रीडिंग के सवाल
जानकार मन के कहना हे कि स्मार्ट मीटर बंद घर के स्थिति मं घलो रीडिंग दर्ज कर सकथे। घर मं एसी, इंडक्शन जइसन ज्यादा बिजली खपत करे वाले उपकरण चलाय जाथें, त बिजली के लोड बढ़ सकथे। ए स्थिति मं उपभोक्ता मन ले ऊर्जा दक्ष उपकरण इस्तेमाल करे के सलाह दी जात हे, ताकि बिजली के खपत कम रखे जा सके।
बिना तय एसओपी मीटर लगाए के आरोप
विशेषज्ञ मन के आरोप हे कि करीब ढाई साल ले स्मार्ट मीटर लगाए के काम चलत हवय, फेर ए काम बर तय मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी के कमी के सवाल उठत रहिस। घरेलू उपभोक्ता मन के घर मं लगातार स्मार्ट मीटर लगाए जाने ले कई जगह नाराजगी देखे बर मिलत हे।
घरेलू उपभोक्ता मन बर अनिवार्यता पर सवाल
जानकार मन के मत हे कि प्री-पेड स्मार्ट मीटर ला सरकारी दफ्तर अउ संस्थान मन मं अनिवार्य करना ज्यादा जरूरी रहिस, ताकि बकाया बिजली बिल के समस्या कम हो सके। उनका कहना हे कि सामान्य घरेलू अउ कृषि उपभोक्ता मन बर ए व्यवस्था के जरूरत पर दोबारा विचार होना चाही।
जानकार मन के मुताबिक, सामान्य मीटर के तुलना मं स्मार्ट मीटर के कीमत करीब दस गुना तक ज्यादा हो सकथे। ए लागत के असर आखिरकार बिजली कंपनी अउ उपभोक्ता दूनो ऊपर पड़ सकथे।
सिक्योरिटी डिपॉजिट के पैसा के का होही?
पोस्टपेड मीटर ले प्री-पेड व्यवस्था मं जाए के बाद उपभोक्ता मन के पुराना सुरक्षा जमा राशि ला लेके घलो सवाल उठे हवय। विद्युत अधिनियम 2003 के धारा 47(5) मं प्रावधान हे कि प्री-पेड मीटर लेय बर इच्छुक उपभोक्ता ले अलग ले अतिरिक्त सुरक्षा जमा राशि नई मांगे जा सकय।
ए स्थिति मं जानकार मन के कहना हे कि पुराना अंतिम बिल के हिसाब-किताब करे के बाद बांचे सुरक्षा राशि ला उपभोक्ता के प्री-पेड बैलेंस मं जोड़ना चाही या नियम के मुताबिक बैंक खाता मं वापस करना चाही।
वहीं, धारा 47(4) के तहत मीटर व्यवस्था बदले के तारीख तक जमा राशि ऊपर ब्याज देय होय के प्रावधान के पालन करे के बात घलो उठाए गे हवय। स्मार्ट मीटर ला लेके अब उपभोक्ता मन के सवाल के समाधान अउ बिलिंग व्यवस्था मं पारदर्शिता लाना जरूरी माने जावत हे।



