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Sirpur UNESCO Tentative List: छत्तीसगढ़ के सिरपुर को मिली बड़ी उपलब्धि, UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में मिली जगह, विश्व धरोहर बनने की उम्मीदें बढ़ीं

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Sirpur UNESCO Tentative List: छत्तीसगढ़ के सिरपुर को मिली बड़ी उपलब्धि, UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में मिली जगह, विश्व धरोहर बनने की उम्मीदें बढ़ीं

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42793-sirpurunescotentativelist Sirpur UNESCO Tentative List: छत्तीसगढ़ के सिरपुर को मिली बड़ी उपलब्धि, UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में मिली जगह, विश्व धरोहर बनने की उम्मीदें बढ़ीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित प्राचीन नगरी सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची यानी टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है। इस उपलब्धि से सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और भविष्य में विश्व धरोहर का दर्जा हासिल करने की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। प्राचीन मंदिरों, बौद्ध विहारों, दुर्लभ मूर्तियों और पुरातात्विक अवशेषों से समृद्ध यह स्थल भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

दक्षिण कोसल की प्राचीन राजधानी रहा सिरपुर

सिरपुर को प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से जाना जाता था। पांडुवंशी शासकों के शासनकाल में यह दक्षिण कोसल की राजधानी और राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा। महानदी के किनारे बसे इस नगर में मंदिरों, बौद्ध विहारों, सरोवरों और उद्यानों का निर्माण हुआ। महाशिवगुप्त बालार्जुन के शासनकाल में सिरपुर ने विशेष समृद्धि हासिल की। सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी यहां की यात्रा की थी। उनके विवरण में सिरपुर की बौद्ध परंपरा और यहां मौजूद बौद्ध संघों का उल्लेख मिलता है।

लक्ष्मण मंदिर है सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान

सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण माना जाता है। लगभग सातवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर ईंटों से बने मंदिरों की उत्कृष्ट परंपरा को दर्शाता है। इसकी बनावट, नक्काशी और बाहरी दीवारों पर उकेरी गई कलात्मक आकृतियां इसकी ऐतिहासिक महत्ता को सामने लाती हैं। मंदिर में गर्भगृह, अंतराल और मंडप जैसी स्थापत्य संरचनाएं हैं। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर का निर्माण महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता रानी वासटा ने अपने पति हर्षगुप्त की स्मृति में कराया था। इसका निर्माणकाल लगभग 650 ईस्वी माना जाता है।

बौद्ध विहारों से समृद्ध है सिरपुर की विरासत

सिरपुर में पुरातात्विक उत्खनन के दौरान कई बौद्ध विहारों के अवशेष मिले हैं। इनमें आनंदप्रभु कुटी विहार और स्वास्तिक विहार प्रमुख हैं। आनंदप्रभु कुटी विहार में भिक्षुओं के निवास के लिए 14 कक्ष होने के प्रमाण मिले हैं। यहां भगवान बुद्ध की भूमिस्पर्श मुद्रा में प्रतिमा भी प्राप्त हुई है। इसके अलावा तीवरदेव महाविहार के अवशेष भी इस क्षेत्र की समृद्ध बौद्ध स्थापत्य परंपरा को उजागर करते हैं। यहां मिले प्रवेश द्वार और अन्य शिल्पांकन तत्कालीन कला, सामाजिक जीवन और धार्मिक गतिविधियों की झलक प्रस्तुत करते हैं।

दो हजार से अधिक पुरावशेषों में छिपा है इतिहास

सिरपुर में हुए पुरातात्विक उत्खननों से दो हजार से ज्यादा पुरावशेष मिलने की जानकारी सामने आई है। इनमें धातु की प्रतिमाएं, आभूषण बनाने के उपकरण, लोहे के बर्तन, ताले, जंजीरें, दीपक, पूजा सामग्री, मिट्टी के बर्तन, कांच की चूड़ियां, मुहरें, खिलौने और प्राचीन सिक्के शामिल हैं। यहां से प्राप्त सिक्के सिरपुर के व्यापारिक संबंधों और अलग-अलग ऐतिहासिक कालखंडों की जानकारी देते हैं। चीनी सिक्कों के साथ शरभपुरीय और कलचुरी काल से जुड़े सिक्कों की प्राप्ति इस प्राचीन नगर के व्यापक संपर्कों की ओर संकेत करती है।

धातु मूर्तिकला और धार्मिक विविधता का प्रमुख केंद्र

सातवीं और आठवीं शताब्दी के दौरान सिरपुर धातु मूर्तिकला के लिए भी जाना जाता था। यहां से भगवान बुद्ध, अवलोकितेश्वर, पद्मपाणि, वज्रपाणि, मंजुश्री, तारा, ऋषभनाथ और भगवान विष्णु से जुड़ी प्रतिमाएं मिली हैं। ये कलाकृतियां क्षेत्र में विकसित शिल्पकला और धार्मिक परंपराओं की विविधता को दर्शाती हैं। सिरपुर की विशेषता यह भी है कि यहां शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन परंपराओं से जुड़े प्रमाण एक ही ऐतिहासिक क्षेत्र में मिलते हैं। यह विविधता इसे सांस्कृतिक सह-अस्तित्व के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करती है।

यूनेस्को की सूची से पर्यटन को मिल सकती है नई दिशा

सिरपुर का यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक और पुरातात्विक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बढ़ने से यहां इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, पर्यटकों और बौद्ध धर्म के अनुयायियों की रुचि बढ़ने की संभावना है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय होटल, होमस्टे, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य रोजगार आधारित गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि, पर्यटन से जुड़े इन संभावित लाभों को साकार करने के लिए बेहतर सुविधाओं, संरक्षण और योजनाबद्ध विकास की जरूरत होगी।

विश्व धरोहर बनने के लिए अभी पूरी करनी होगी प्रक्रिया

यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना किसी स्थल को विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलना नहीं है। यह उस प्रक्रिया का प्रारंभिक और महत्वपूर्ण चरण है, जिसके बाद संबंधित स्थल के लिए विस्तृत नामांकन, संरक्षण प्रबंधन और मूल्यांकन से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। सिरपुर की ऐतिहासिक संरचनाएं, बौद्ध विहार, प्राचीन मंदिर, दुर्लभ पुरावशेष और धार्मिक परंपराओं का सह-अस्तित्व इसे वैश्विक सांस्कृतिक महत्व वाला स्थल बनाते हैं। अब संरक्षण और नामांकन की आगे की प्रक्रिया के जरिए सिरपुर को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाने की उम्मीद है।

साभार: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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