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Shardiya Navratri 2026 : मां महामाया मंदिर की अनोखी परंपरा, चकमक पत्थरों से अग्नि पैदा कर कुंवारी कन्या जलाती है नवरात्र का पहला जोत

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Shardiya Navratri 2026 : मां महामाया मंदिर की अनोखी परंपरा, चकमक पत्थरों से अग्नि पैदा कर कुंवारी कन्या जलाती है नवरात्र का पहला जोत

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Shardiya Navratri 2026 : रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित प्राचीन सिद्धपीठ मां महामाया मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और अनूठी परंपराओं के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां नवरात्र के दौरान प्रथम ज्योत प्रज्वलित करने की परंपरा बेहद खास है। मान्यता के अनुसार, नवरात्र की शुरुआत 10 वर्ष से कम उम्र की कुंवारी कन्या के हाथों पहला जोत जलाकर की जाती है। इसके बाद ही मंदिर में अन्य ज्योत प्रज्वलित करने की प्रक्रिया शुरू होती है।

कुंवारी कन्या को माना जाता है देवी का स्वरूप

मंदिर की इस परंपरा के पीछे देवी भगवती के कुंवारी और ब्रह्मचारिणी स्वरूप की मान्यता जुड़ी है। प्रथम ज्योत प्रज्वलित करने वाली कन्या का पूजन किया जाता है और उसे देवी का स्वरूप मानकर सम्मान दिया जाता है। इसके बाद मां महामाया से अन्य ज्योत जलाने की अनुमति और आशीर्वाद मांगा जाता है, ताकि नवरात्र का पर्व निर्विघ्न संपन्न हो और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हों।

माचिस नहीं, चकमक पत्थरों से पैदा की जाती है अग्नि

इस परंपरा की एक और खास बात यह है कि प्रथम ज्योत किसी माचिस या पहले से जल रही अग्नि से नहीं, बल्कि दो चकमक पत्थरों को आपस में रगड़कर पैदा की गई अग्नि से प्रज्वलित की जाती है। मंदिर में चैत्र और शारदीय, दोनों नवरात्रों के दौरान इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है।

हैहयवंशी राजाओं की कुलदेवी हैं मां महामाया

मंदिर के पुजारी के अनुसार, मां महामाया को हैहयवंशी राजाओं की कुलदेवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि राजाओं ने अपने महलों और राजधानियों वाले क्षेत्रों में देवी की स्थापना कराई थी। छत्तीसगढ़ के 36 स्थानों पर मां महामाया की प्रतिष्ठा से जुड़ी मान्यता भी प्रचलित है।

तंत्र पीठ के रूप में भी है विशेष पहचान

मंदिर के व्यवस्थापक विजय कुमार झा के अनुसार, कुंवारी कन्या से प्रथम ज्योत प्रज्वलित कराने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। मंदिर को तंत्र, मंत्र और यंत्र साधना से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी माना जाता है। नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां महामाया के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मां महामाया मंदिर की यह परंपरा आस्था, धार्मिक मान्यताओं और सदियों से चली आ रही पूजा-पद्धति का अनूठा संगम मानी जाती है।

साभार: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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