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Red Fort blast case: लाल किला धमाके के पीछे अल-कायदा का हाथ, UN रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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Red Fort blast case: लाल किला धमाके के पीछे अल-कायदा का हाथ, UN रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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35560-red-fort-blast-al-qaeda-un-report Red Fort blast case: लाल किला धमाके के पीछे अल-कायदा का हाथ, UN रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Red Fort blast case: नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए कार बम धमाके को लेकर बड़ा अंतरराष्ट्रीय खुलासा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 प्रतिबंध समिति की निगरानी टीम की हालिया रिपोर्ट में इस हमले को अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जोड़ा  है। रिपोर्ट में AQIS की अफगानिस्तान और बांग्लादेश में बढ़ती गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई गई है।

10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए इस शक्तिशाली कार बम विस्फोट में 11 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है। NIA ने मई 2026 में दाखिल 7,500 पन्नों की चार्जशीट में कहा था कि मामले के सभी 10 आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े थे, जिसे AQIS का ऑफशूट बताया गया है।

अफगानिस्तान में सक्रिय है अल-कायदा नेटवर्क

UN की निगरानी रिपोर्ट में कहा गया है कि AQIS अफगानिस्तान में अब भी सक्रिय है। रिपोर्ट के मुताबिक संगठन के शीर्ष नेता काबुल में मौजूद हैं और समूह की गतिविधियां दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में जारी हैं। AQIS की मीडिया गतिविधियों का केंद्र हेरात में होने की भी बात रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट में अल-कायदा के बाहरी अभियानों पर बढ़ते फोकस को लेकर चिंता जताई गई है। इसके साथ ही संगठन के क्षेत्रीय स्तर पर अपने नेटवर्क का विस्तार करने के प्रयासों पर भी निगरानी रखने की जरूरत बताई गई है।

बांग्लादेश में नेटवर्क फैलाने की कोशिश

UN की रिपोर्ट में अल-कायदा की बांग्लादेश में बढ़ती गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है। निगरानी टीम के मुताबिक संगठन वहां अपने सेल स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इससे दक्षिण एशिया में आतंकवादी नेटवर्क के विस्तार को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। अल-कायदा को लेकर भारत की सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही सतर्क रही हैं। NIA की जांच में भी दिल्ली धमाके के आरोपियों के संबंध AGuH से सामने आए हैं।

NIA की जांच में सामने आई बड़ी साजिश

NIA के मुताबिक, लाल किला धमाके की साजिश में शामिल आरोपियों में मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी भी था, जिसकी विस्फोट में मौत हो गई थी। एजेंसी ने अपनी जांच में पाया कि आरोपी AGuH के जरिए अल-कायदा की विचारधारा से प्रभावित थे।

NIA के अनुसार, आरोपियों ने 2022 में एक गुप्त बैठक के दौरान AGuH को नए रूप में संगठित किया था। जांच एजेंसी ने इस मॉड्यूल को ‘AGuH Interim’ के नाम से गठित किए जाने और इसके तहत ‘ऑपरेशन हेवेनली हिंद’ चलाए जाने की बात कही है।

जून 2026 में NIA ने मामले में तीन और आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके साथ ही मामले में आरोपपत्र दाखिल किए गए आरोपियों की संख्या 13 हो गई थी। NIA के मुताबिक इनमें से कुछ आरोपी AGuH Interim के गठन और साजिश में अहम भूमिका निभा रहे थे।

क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल पर भी चिंता

UN की निगरानी टीम ने आतंकवादी संगठनों द्वारा धन जुटाने और उसे अपने नेटवर्क तथा स्लीपर सेल तक पहुंचाने के लिए डिजिटल करेंसी के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट में आतंकवादी संगठनों से जुड़े क्रिप्टोकरेंसी पतों को प्रतिबंध व्यवस्था के दायरे में लाने पर विचार करने की सलाह दी गई है।

UN की रिपोर्ट में अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े संगठनों की रासायनिक और जैविक सामग्री हासिल करने में बढ़ती रुचि को लेकर भी चिंता जताई गई है। इससे आतंकवादी संगठनों की बदलती रणनीति और तकनीकी क्षमता को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो रही है। 

Source: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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