गलत विज्ञापनों पर रैपिडो पर कार्रवाई, 10 लाख का जुर्माना और तुरंत रिफंड का आदेश
उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने बाइक टैक्सी और ऑटो सेवा देने वाली राइड-हेलिंग कंपनी रैपिडो पर गलत और भ्रामक विज्ञापन चलाने के लिए 10 लाख रुपए का जुर्माना ठोका है। इसके साथ ही कंपनी को आदेश दिया गया है कि वह तुरंत ग्राहकों के पैसे रिफंड करे और सभी भ्रामक विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से हटा ले।
रैपिडो ने अपने विज्ञापनों में दावा किया था कि उसकी सेवा “5 मिनट में ऑटो उपलब्ध होगी या 50 रुपए कैशबैक मिलेगा”। इसके अलावा कंपनी ने ग्राहकों को कुछ और गारंटीड सेवाएं देने की भी बात कही थी। लेकिन असलियत में यह दावे खोखले साबित हुए। पिछले दो वर्षों में करीब 1800 से अधिक ग्राहकों ने शिकायत दर्ज कराई कि रैपिडो ने अपने वादों को पूरा नहीं किया।
जांच में यह भी सामने आया कि रैपिडो ने अपने ऐसे झूठे दावों वाले विज्ञापन लगभग 548 दिनों तक लगातार चलाए और यह प्रचार देशभर के 120 शहरों में विभिन्न भाषाओं में किया गया। इतने लंबे समय तक चलाए गए विज्ञापनों ने लाखों ग्राहकों को प्रभावित किया और लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई गलत दावों पर भरोसा करके खर्च की।
CCPA का यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। यह केवल रैपिडो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी कंपनियों के लिए चेतावनी है जो भ्रामक विज्ञापन चलाकर ग्राहकों को गुमराह करने की कोशिश करती हैं। उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अब ऐसी कंपनियों पर न केवल जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उन्हें उपभोक्ताओं को रिफंड देने और भ्रामक विज्ञापन वापस लेने के लिए मजबूर भी किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय आने वाले समय में मार्केटिंग और विज्ञापन जगत के लिए भी एक अहम सबक होगा। कंपनियों को अब अपने प्रचार में पारदर्शिता बरतनी होगी और केवल वही वादे करने होंगे जिन्हें वे सचमुच पूरा कर सकती हैं।
इस कार्रवाई से यह भी साबित होता है कि यदि उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराते हैं और अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते हैं तो कानून उन्हें न्याय दिलाने में सक्षम है। रैपिडो मामले ने यह साफ कर दिया कि अब भ्रामक विज्ञापन और झूठे दावे लंबे समय तक नहीं चल पाएंगे और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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