PWD में टेंडर घोटाला; बिड में सामिल नहीं होय फर्म ला दे दिस 50 लाख के काम, कागज में हेराफेरी करके कर दिस भुगतान
Raipur PWD Scam : रायपुर। राजधानी रायपुर के लोक निर्माण विभाग (PWD) में टेंडर प्रक्रिया में बड़े भ्रष्टाचार अउ गड़बड़ी के मामला आगू आए हे। विद्युत/यांत्रिकी (E/M) डिवीजन के अधिकारी मन ह 50 लाख रूपया के काम ओ फर्म ला दे दे हें, जेहर टेंडर प्रक्रिया में सामिल घलो नहीं रिहिस। सबले चकित करे वाला बात ये हे कि कागज मन में हेराफेरी करके एक फर्म के नाम ला काट के दूसर फर्म के नाम लिख दिय गीस अउ उही आधार में काम के आदेस जारी करके भुगतान घलो कर दिय गे हे।
L-1 फर्म ला छोड़ के दूसर ला ठेका: जानकारी के मुताबिक, टेंडर नंबर 152168 के तहत एलईडी आरजीबी कलर स्ट्रिप लाइट लगाय बर 50 लाख रूपया के टेंडर निकाले गे रिहिस। ए प्रक्रिया में ‘मेसर्स श्री जी इलेक्ट्रिकल्स’ समेत चार फर्म मन हिस्सा लिन। जांच के बाद दो फर्म ‘श्री जी इलेक्ट्रिकल्स’ अउ ‘श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर’ क्वालिफाई होइन। नियम के हिसाब ले, सबले कम दर (L-1) भरे वाला ‘श्री जी इलेक्ट्रिकल्स’ ला काम मिलना रिहिस अउ सुरु में वर्क ऑर्डर घलो ओकरे नाम ले जारी होइस।
कागज में नाम बदल के दे दिय गे काम: फेर बाद में फाइल मन में खेल होइस। ‘श्री जी इलेक्ट्रिकल्स’ के नाम ला काट के ‘फॉर्च्यून अंश’ नाम के फर्म के नाम लिख दिय गीस। ए फर्म ह न त टेंडर में सामिल रिहिस अउ न ही कोनो बिड जमा करे रिहिस। एकर बाद घलो अधिकारी मन ह ओला काम सउँप दिन।
बिना जांच के होगे भुगतान: ए मामला में ये घलो पता चलीस हे कि उही बखत के कार्यपालन अभियंता ह बिना कोनो कागज देखे ‘फॉर्च्यून अंश’ के नाम ले कार्यादेश जारी कर दिस। अतके नहीं, नियम मन ला ताक में रख के पूरा 50 लाख रूपया के भुगतान घलो कर दिय गे हे। ए पूरा मामला में अधीक्षण अभियंता के भूमिका ऊपर घलो सवाल उठत हे।
नोटशीट में साफ दिखीस गड़बड़ी: जांच में पता चलीस कि विभाग के नोटशीट में बाबू स्तर ले ही नाम ला बदले गे रिहिस। ‘श्री जी इलेक्ट्रिकल्स’ ला हटा के ‘फॉर्च्यून अंश’ लिखे गीस, जो साफ-साफ कागज में छेड़छाड़ के मामला आय। फाइल में ये घलो लिख दिय गीस कि ‘श्री जी इलेक्ट्रिकल्स’ ला लाइसेंस में कुछ छूट दिय गे हे, जबकि अइसन कोनो जानकारी टेंडर के कागज में नहीं रिहिस।
अधिकारी मन के कहना: ए पूरा मामला में पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मन के कहना हे कि ओमन ला अभी एखर जानकारी नहीं हे। ओमन किहिन कि कागज मन ला देखे के बाद ही कुछु साफ कहे जा सकही।



